अट्टुकल पोंगल 2026: कब है पूरम नक्षत्र तिथि और समय

अट्टुकल पोंगल 2026 मंगलवार 3 मार्च को मनाया जाएगा। यह उत्सव पूरम नक्षत्र पर आधारित है। पूरम नक्षत्र 3 मार्च 2026 को सुबह 07:31 बजे से प्रारम्भ होकर 4 मार्च 2026 को सुबह 07:39 बजे तक रहेगा। पंचांग के अनुसार नक्षत्र प्रारम्भ होने के बाद 3 मार्च को ही मुख्य आयोजन किया जाएगा। मंदिर के स्थानीय कैलेंडर के अनुसार वास्तविक तिथि में एक दिन का अंतर संभव हो सकता है। सभी समय भारतीय मानक समय (IST)

Attukal Pongal - March
Attukal Pongal - March

अट्टुकल पोंगल 2026 मंगलवार  3 मार्च को मनाया जाएगा। यह उत्सव केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित प्रसिद्ध अट्टुकल भगवती मंदिर से जुड़ा है और दक्षिण भारत के प्रमुख महिला-केंद्रित धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। 

यह पर्व तिथि के बजाय पूरम नक्षत्र के आधार पर निर्धारित होता है  इसलिए इसकी तिथि हर वर्ष बदल सकती है। मंदिर परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतिम दिन का निर्धारण किया जाता है।

अट्टुकल पोंगल 2026 नक्षत्र समय

(सभी समय 24:00+ प्रारूप में  दिल्ली  भारत के स्थानीय समय IST के अनुसार)

विवरणसमय
पर्व का दिनमंगलवार  3 मार्च 2026
पूरम नक्षत्र प्रारम्भ3 मार्च 2026  07:31
पूरम नक्षत्र समाप्त4 मार्च 2026  07:39
मुख्य अनुष्ठान3 मार्च (नक्षत्र प्रारम्भ के बाद)

पंचांग के अनुसार जिस दिन पूरम नक्षत्र का प्रभाव प्रमुख रूप से रहता है  उसी दिन अट्टुकल पोंगल का आयोजन किया जाता है। वास्तविक आयोजन मंदिर के स्थानीय कैलेंडर और परंपराओं पर निर्भर हो सकता है।

अट्टुकल पोंगल उत्सव अट्टुकल भगवती मंदिर में आयोजित होने वाला दस दिवसीय पर्व है। इस मंदिर को देवी भगवती के प्रमुख शक्ति पीठों में माना जाता है। उत्सव के दौरान लाखों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं  जिससे यह विश्व के बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है।

इस महोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण दिन नवम दिन होता है  जब पोंगल अर्पण किया जाता है। पोंगल का अर्थ है विशेष प्रसाद पकाना  जो समर्पण और सामूहिक भागीदारी का प्रतीक माना जाता है।

अट्टुकल पोंगल उन पर्वों में से है जो चंद्र नक्षत्र के आधार पर निर्धारित होते हैं। भारतीय पंचांग में नक्षत्र प्रणाली समय गणना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पूरम नक्षत्र को उत्सव और आयोजन से जुड़ा नक्षत्र माना जाता है  इसलिए इस दिन सामूहिक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

यह पर्व मुख्य रूप से केरल और मलयालम परंपरा से जुड़ा है  लेकिन इसकी प्रसिद्धि के कारण देश-विदेश से भी लोग इसमें भाग लेते हैं। दक्षिण भारतीय संस्कृति में मंदिर उत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का माध्यम भी होते हैं।

अट्टुकल पोंगल उत्सव कई दिनों तक चलने वाली परंपरा है  जिसमें प्रारंभिक दिनों में धार्मिक अनुष्ठान और अंतिम दिनों में सामूहिक आयोजन होते हैं। अंतिम चरण में विशेष अनुष्ठान के साथ पर्व का समापन होता है। यह संरचना दक्षिण भारतीय मंदिर उत्सवों की विशिष्ट शैली को दर्शाती है।

अट्टुकल पोंगल 2026 पूरम नक्षत्र पर आधारित केरल का प्रमुख मंदिर उत्सव है  जो 3 मार्च को मनाया जाएगा। यह पर्व नक्षत्र गणना  मंदिर परंपरा और सामूहिक भागीदारी का अनूठा उदाहरण है।

अस्वीकरण: यह जानकारी पारंपरिक पंचांग गणना  क्षेत्रीय मान्यताओं और उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। अट्टुकल पोंगल जैसे मंदिर-आधारित उत्सवों की वास्तविक तिथि स्थानीय मंदिर कैलेंडर  परंपरा और आधिकारिक घोषणा के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती है। अंतिम निर्णय संबंधित मंदिर प्रशासन या स्थानीय पंचांग के अनुसार ही मान्य होता है। समय स्थान और गणना पद्धति के अनुसार बदल सकते हैं।

अट्टुकल पोंगल 2026 कब है?

अट्टुकल पोंगल 2026 मंगलवार, 3 मार्च को मनाया जाएगा। यह पर्व पूरम नक्षत्र के आधार पर निर्धारित होता है।

पूरम नक्षत्र 2026 में कब से कब तक रहेगा?

पूरम नक्षत्र 3 मार्च 2026 को सुबह 07:31 बजे से शुरू होकर 4 मार्च 2026 को सुबह 07:39 बजे तक रहेगा।

अट्टुकल पोंगल का मुख्य दिन 3 मार्च क्यों माना जाएगा?

नक्षत्र आधारित पर्व उस दिन मनाया जाता है जब नक्षत्र का प्रभाव प्रमुख रूप से रहता है। 3 मार्च को नक्षत्र प्रारम्भ होने के कारण इसी दिन मुख्य आयोजन होगा

क्या अट्टुकल पोंगल की तिथि हर वर्ष बदलती है?

हाँ क्योंकि यह पर्व तिथि नहीं बल्कि नक्षत्र पर आधारित है इसलिए पंचांग और नक्षत्र के अनुसार इसकी तिथि हर साल अलग हो सकती है



TOPICS 2026 Hindu Festival

First Published on: February 27, 2026 8:38 pm IST

About the Author: Suhani Chauhan

I am Suhani Chauhan, a Religion and Hindu Calendar researcher at Hinduifestival.com, specializing in Hindu festivals, Panchang, and tithi systems. I study classical scriptures, traditional Panchang methods, and astronomical principles to understand sacred timekeeping. My work explains how lunar and solar cycles shape religious dates and rituals across India. I aim to present Hindu calendar knowledge in a clear, accurate, and trustworthy way for modern reader