Durga Mata Ki Aarti Lyrics| मां दुर्गा की आरती, जय अंबे गौरी जय श्यामा गौरी

Durga Mata Ki Aarti “जय अंबे गौरी जय श्यामा गौरी” नवरात्रि में मां दुर्गा को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली आरती है। इसमें देवी के सौंदर्य, शक्ति, और राक्षस-विनाशक रूप का भव्य वर्णन है। इस लेख में पढ़ें मां दुर्गा की आरती के बोल अर्थ सहित – Maa Durga Navratri Aarti Lyrics in Hindi.

Durga Mata Ki Aarti Lyrics| मां दुर्गा की आरती, जय अंबे गौरी जय श्यामा गौरी

हर साल नवरात्रि के दिनों में मन अपने-आप एक अलग ही ऊर्जा से भर जाता है। संध्या के समय जब माँ दुर्गा की “जय अंबे गौरी” आरती डमरू मृदंग और शंख की ध्वनि के साथ गूंजती है तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है और ऐसा महसूस होता है मानो चारों ओर शक्ति का संचार हो रहा हो।

मेरे अनुभव में दुर्गा माता की आरती करते समय स्थान को स्वच्छ और शांत रखना बहुत महत्वपूर्ण होता है। चंदन कपूर और गुलाल से माँ का श्रृंगार करने से पूजा का भाव और गहरा हो जाता है। आरती के बाद जब सब मिलकर “जयकारा शेरावाली दा” बोलते हैं तो भीतर एक नया साहस संतुलन और सकारात्मकता महसूस होती है जैसे माँ की कृपा पूरे घर में फैल गई हो।

जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ओम जय अंबे गौरी

मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दो‌उ नैना, चन्द्रवदन नीको॥ ओम जय अंबे गौरी

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥ ओम जय अंबे गौरी

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥ ओम जय अंबे गौरी

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥ ओम जय अंबे गौरी

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥ ओम जय अंबे गौरी

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे॥ ओम जय अंबे गौरी

ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥ ओम जय अंबे गौरी

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूं।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥ ओम जय अंबे गौरी

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्‍तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥ ओम जय अंबे गौरी

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥ ओम जय अंबे गौरी

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥ ओम जय अंबे गौरी

श्री अम्बेजी की आरती, जो को‌ई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥ ओम जय अंबे गौरी

जोर से बोलो – जय माता दी!
सारे बोलो – जय माता दी!
जयकारा शेरावाली का – बोल सांचे दरबार की जय!

Durga Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi
Durga Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi

मुख्य भावार्थ (संक्षिप्त अर्थ)

  • माँ दुर्गा ब्रह्मा, विष्णु, शिव द्वारा पूजित हैं।
  • उनका स्वरूप सिंदूर से सुशोभित, चन्द्रवदन और ज्योतिर्मयी है।
  • सिंह वाहन पर सवार, हाथों में खड्ग और खप्पर है।
  • उन्होंने महिषासुर, शुम्भ-निशुम्भ, चण्ड-मुण्ड, मधु-कैटभ जैसे दैत्यों का संहार किया।
  • वे ब्रह्माणी, रुद्राणी, लक्ष्मी और पार्वती सभी रूपों में प्रतिष्ठित हैं।
  • 64 योगिनियाँ, भैरव, डमरू और मृदंग की ताल पर नृत्य करते हैं।
  • वे भक्तों को सुख, शक्ति और संपत्ति प्रदान करती हैं।

आरती के बाद की परंपराएँ

  • तुलसी माता को आरती दिखाएं – शक्ति और शांति दोनों का संतुलन होता है।
  • घर के प्रत्येक सदस्य को आरती दें।
  • शंख या डमरू की ध्वनि के साथ ‘जयकारा शेरावाली का’ बोलें।
  • कपूर, गुलाल, और नारियल का भोग अर्पित करें।

जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥


➤ अर्थ:
हे माँ अंबे गौरी! आपकी जय हो। आपको दिन-रात हरि (विष्णु), ब्रह्मा और शिव भी ध्यान करते हैं।

मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दो‌उ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
➤ अर्थ:
आपके मांग में सिन्दूर शोभा देता है, माथे पर मृगमद (कस्तूरी) का तिलक है। आपकी आंखें उज्जवल और मुख चन्द्रमा जैसा सुंदर है।

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
➤ अर्थ:
आपका शरीर सोने जैसा चमकदार है, आप लाल वस्त्र धारण किए हैं। गले में लाल फूलों की माला और सुंदर आभूषण सुशोभित हैं।

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥


➤ अर्थ:
आप सिंह पर सवार हैं, हाथों में तलवार और खप्पर है। देवता, मनुष्य और ऋषि-मुनि आपकी सेवा करते हैं; आप उनके सारे दुःख हरती हैं।

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
➤ अर्थ:
आपके कानों में झुमके और नाक में मोती की बाली सुशोभित है। आपकी आभा करोड़ों सूर्य और चंद्रमा के समान तेजस्वी है।

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥


➤ अर्थ:
आपने शुम्भ-निशुम्भ जैसे राक्षसों का वध किया और महिषासुर का संहार किया। आपकी आंखों की ज्वाला धुएं जैसी है, आप सदा शक्तिमयी रहती हैं।

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे॥


➤ अर्थ:
आपने चण्ड-मुण्ड और रक्तबीज जैसे राक्षसों का नाश किया। मधु और कैटभ को भी मारा और देवताओं को भयमुक्त किया।

ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥


➤ अर्थ:
आप ब्रह्मा की शक्ति ब्रह्माणी, शिव की शक्ति रुद्राणी, और विष्णु की पत्नी लक्ष्मी (कमला) हैं। शास्त्रों में आपकी महिमा गाई जाती है, आप शिवजी की अर्धांगिनी हैं।

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूं।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥


➤ अर्थ:
चौंसठ योगिनियाँ आपकी स्तुति करती हैं और भैरव नृत्य करते हैं। मृदंग और डमरू की ताल से वातावरण गूंजता है।

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्‍तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥


➤ अर्थ:
आप ही संपूर्ण जगत की माता और पालन करने वाली हैं। आप ही अपने भक्तों के दुःख दूर कर सुख, समृद्धि और शांति देती हैं।

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥


➤ अर्थ:
आपकी चारों भुजाएँ अत्यंत शोभायमान हैं, आप वरदान देने वाली मुद्रा में हैं। जो भी स्त्री-पुरुष आपकी सेवा करते हैं, वे अपनी इच्छित फल पाते हैं।

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥


➤ अर्थ:
आपकी आरती के लिए सोने की थाली में कपूर और अगर की बातियाँ जलती हैं। आप श्रीमालकेतु (श्री स्वरूप) में विराजमान हैं और करोड़ों रत्नों की ज्योति से प्रकाशित हैं।

श्री अम्बेजी की आरती, जो को‌ई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥


➤ अर्थ:
जो भी भक्त श्रद्धा से माँ अम्बे की आरती करता है, वह सुख और समृद्धि को प्राप्त करता है – ऐसा शिवानन्द स्वामी कहते हैं।

जयकारा

जोर से बोलो – जय माता दी!
सारे बोलो – जय माता दी!
जयकारा शेरावाली का – बोल सांचे दरबार की जय!

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TOPICS Durga

First Published on: March 1, 2026 2:52 pm IST

About the Author: Ritika Rawal

I am Ritika Rawal, a ground-level religious writer exploring Gods, Aarti traditions, Horoscope, Panchang and temple culture. I work closely with local pandits and experienced astrologers, bringing their real insights to readers. My focus is pure, authentic spiritual reporting that connects rituals with everyday faith.