Aaj ka Panchang 3 March 2026: फाल्गुन पूर्णिमा, होलिका दहन आज देखें शुभ समय राहुकाल और चंद्र राशि
Aaj ka panchang 3 March 2026: फाल्गुन पूर्णिमा और होलिका दहन के दिन जानें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और आज का पूरा पंचांग।

02 मार्च 2026 सोमवार का दिन फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के साथ जुड़ा हुआ है। पूर्णिमा से ठीक पहले आने वाली यह तिथि पारंपरिक पंचांग संरचना में महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इसी चरण में चंद्रमा लगभग पूर्ण आकार की ओर बढ़ता है।
दिन की समय व्यवस्था को समझने के लिए पंचांग के पाँच अंग तिथि वार नक्षत्र योग और करण देखे जाते हैं। इन तत्वों के आधार पर दिन के शुभ और अशुभ समय का पारंपरिक निर्धारण किया जाता है।
आज चंद्रमा कर्क राशि में स्थित रहकर बाद में सिंह राशि की ओर अग्रसर होगा। नक्षत्र क्रम में दिन की शुरुआत आश्लेषा नक्षत्र से होती है जो चंद्रमा के संवेदनशील और अंतर्मुखी स्वभाव से जुड़ा माना जाता है।
सूर्य कुंभ राशि में स्थित है जिससे यह समय उत्तरायण के अंतर्गत आता है और बसंत ऋतु की शुरुआत का संकेत देता है।
पंचांग का पारंपरिक ढांचा और आज की तिथि का अर्थ
चतुर्दशी तिथि को चंद्र चक्र के अंतिम चरणों में गिना जाता है। इस समय चंद्रमा का प्रकाश लगभग पूर्ण होता है इसलिए इसे पूर्णिमा की तैयारी का दिन भी कहा जाता है। कई धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में इस तिथि का उपयोग संध्या पूजा उपासना या ध्यान के लिए किया जाता है हालांकि अलग क्षेत्रों में इसके अर्थ भिन्न हो सकते हैं।
आश्लेषा नक्षत्र सर्प प्रतीक से जुड़ा माना जाता है और पंचांग परंपरा में इसे गहन मनोभावों और आंतरिक ऊर्जा से संबंधित बताया जाता है। योग और करण दिन की सूक्ष्म समय संरचना को दर्शाते हैं जिनका उपयोग विशेष कार्यों के समय निर्धारण में किया जाता है।
02 मार्च 2026 का संपूर्ण पंचांग विवरण
तिथि — शुक्ल चतुर्दशी
नक्षत्र — आश्लेषा (प्रातः तक)
योग — अतिगंड
करण — वणिजा इसके बाद विष्टि
वार — सोमवार
मास — फाल्गुन
पक्ष — शुक्ल
सूर्योदय — 06:38
सूर्यास्त — 18:14
चंद्रोदय — सायं 17:21
चंद्रास्त — प्रातः 05:42
चंद्र राशि — कर्क से सिंह की ओर संक्रमण
सूर्य राशि — कुंभ
विक्रम संवत — 2082
शक संवत — 1947
आज के शुभ समय
पारंपरिक मान्यता के अनुसार दिन में कुछ समय ऐसे होते हैं जिन्हें कार्य आरंभ के लिए अनुकूल माना जाता है।
अभिजीत मुहूर्त — दोपहर 12:03 से 12:49
यह समय दिन के मध्य का माना जाता है और कई परंपराओं में इसे सामान्य शुभ समय की तरह देखा जाता है।
ब्रह्म मुहूर्त — प्रातः लगभग सूर्योदय से पूर्व
यह समय ध्यान अध्ययन या आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
गोधूलि काल — सूर्यास्त के आसपास का समय
परंपरा में इसे दिन और रात के मिलन का प्रतीक माना जाता है।
आज के अशुभ समय
कुछ समय ऐसे भी बताए जाते हैं जिनमें नए कार्य प्रारंभ करने से बचने की सलाह दी जाती है।
राहुकाल — प्रातः 08:05 से 09:32
यमगंड — दोपहर के आसपास
गुलिक काल — दोपहर बाद
ये समय पारंपरिक ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित होते हैं और अलग क्षेत्रों में इनके उपयोग की परंपरा अलग हो सकती है।
चौघड़िया के अनुसार दिन की समय संरचना
चौघड़िया प्रणाली दिन और रात को छोटे भागों में विभाजित करती है। इनमें लाभ अमृत और शुभ को अनुकूल माना जाता है जबकि कुछ अन्य भाग सामान्य या सावधानी वाले माने जाते हैं।
दिन में दोपहर बाद लाभ और अमृत जैसे समय आते हैं जिन्हें पारंपरिक रूप से सकारात्मक माना जाता है। रात में भी अमृत और शुभ काल मौजूद रहते हैं।
दिन का सांस्कृतिक और मौसमी संदर्भ
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष के अंतिम दिनों में वातावरण में बसंत का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। उत्तर भारत में इस समय मौसम परिवर्तन के संकेत मिलते हैं और कई स्थानों पर होली की तैयारी शुरू हो जाती है। पंचांग का उपयोग केवल धार्मिक संदर्भ में ही नहीं बल्कि पारंपरिक जीवनशैली के समय निर्धारण के लिए भी किया जाता रहा है।
02 मार्च 2026 का दिन पंचांग के अनुसार चंद्र चक्र के अंतिम चरणों में स्थित है। चतुर्दशी तिथि आश्लेषा नक्षत्र और अतिगंड योग मिलकर दिन की विशिष्ट संरचना बनाते हैं।
पंचांग का उद्देश्य समय को सांस्कृतिक और खगोलीय संदर्भ में समझाना है ताकि व्यक्ति दिन की पारंपरिक लय को जान सके।
अस्वीकरण: यह जानकारी पारंपरिक पंचांग गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। विभिन्न स्थानों और परंपराओं के अनुसार समय और विवरण में अंतर संभव है। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पहले स्थानीय पंचांग या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
First Published on: March 2, 2026 12:38 pm IST




