आज का पंचांग 18 फरवरी 2026: तिथि, नक्षत्र, राहुकाल और दिन का संकेत

आज 18 फरवरी 2026 को फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा है — क्या यह दिन नई शुरुआत के लिए शुभ माना जाएगा? जानें तिथि, नक्षत्र और राहुकाल

आज का पंचांग 18 फरवरी 2026: तिथि, नक्षत्र, राहुकाल और दिन का संकेत

सुबह का समय थोड़ा धीमा रहेगा। अमावस्या के बाद का पहला उगता चाँद हमेशा ऐसा ही असर देता है  मन पूरी तरह स्थिर नहीं  पर खाली भी नहीं। आज फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा है। पुराने पंचांग देखने वाले लोग इस तिथि को आरंभ का दिन कहते हैं  क्योंकि यहीं से चंद्रमा की वृद्धि शुरू होती है। अगर आप ध्यान दें तो ऐसे दिनों में लोग नए काम की बात ज़्यादा करते हैं  भले शुरू बाद में करें।

चंद्रमा आज कुंभ राशि में रहेगा। कुंभ का स्वामी शनि है  इसलिए दिन की ऊर्जा तेज नहीं बल्कि गहरी होगी। शतभिषा नक्षत्र का प्रभाव रात तक रहेगा। यह नक्षत्र बाहरी दिखावे से ज्यादा भीतर की चीज़ों से जुड़ा माना जाता है  सुधार  उपचार  आत्ममंथन। शिव योग भी बना हुआ है  इसलिए दिन का स्वभाव शांत लेकिन कठोर अनुशासन वाला हो सकता है।

पंचांग तत्वविवरण
तिथिशुक्ल प्रतिपदा (सायं 16:54 तक)
नक्षत्रशतभिषा (रात्रि 21:05 तक)
योगशिव (रात्रि 22:36 तक)
करणबव बालव
वारबुधवार
चंद्र राशिकुंभ
सूर्योदय07:00
सूर्यास्त18:09
राहुकाल12:34 – 13:58
मासफाल्गुन
पक्षशुक्ल

यदि गणना के स्तर पर देखें तो प्रतिपदा तिथि सूर्य और चंद्रमा के बीच 12 अंश का अंतर बनने पर प्रारंभ होती है। यह अंतर चंद्र मास की संरचना तय करता है। शतभिषा नक्षत्र राहु के अधीन है  जो मानसिक एकाग्रता और अलग तरह की सोच देता है। कुंभ राशि में चंद्रमा होने से सामूहिक विषयों  योजनाओं और भविष्य से जुड़े निर्णयों की प्रवृत्ति बढ़ती है।

शिव योग सूर्य और चंद्रमा के दीर्घांशों के योग से बनने वाला 27 योगों में से एक है। मुहूर्त शास्त्र में इसे स्थिर परिणाम देने वाला माना गया है  इसलिए दीर्घकालिक योजना  अध्ययन या अनुशासन से जुड़े कार्य इस योग में किए जाते हैं। करण बव से बालव में परिवर्तन शाम के समय होगा  जो तिथि के आधे भाग का संकेत है और सूक्ष्म मुहूर्त निर्णयों में उपयोग किया जाता है।

वैसे कुंभ राशि की बात करते-करते याद आया  कई पुराने पंचांगों में इस राशि को “समूह और व्यवस्था” का प्रतीक कहा गया है। शायद इसलिए कि जब चंद्रमा यहाँ होता है तो व्यक्ति अकेले कम और व्यवस्था के बारे में ज्यादा सोचता है। हालांकि रोजमर्रा की जिंदगी में इसका असर हर किसी पर अलग दिखता है  क्योंकि जन्म कुंडली का भी प्रभाव होता है  लेकिन दैनिक पंचांग में सामान्य प्रवृत्ति ही देखी जाती है।

दोपहर 12:34 से 13:58 तक राहुकाल रहेगा। इस अवधि में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचा जाता है। पहले से चल रहे कार्यों पर इसका प्रभाव नहीं माना जाता। बुधवार होने के कारण दिन का संबंध बुद्धि  व्यापार और संवाद से माना जाता है  इसलिए राहुकाल के बाद का समय योजना और निर्णय के लिए बेहतर माना जाता है।

फाल्गुन मास का आरंभ भी इसी तिथि से माना जा रहा है  और यही वह समय होता है जब मौसम धीरे-धीरे बदलता है। सर्दी खत्म होने लगती है लेकिन गर्मी अभी नहीं आती। अजीब तरह का संतुलन रहता है  शायद इसलिए इस मास को उत्सवों की तैयारी का समय भी कहा जाता है।


TOPICS Panchang

First Published on: February 17, 2026 7:34 pm IST

About the Author: Ritika Rawal

I am Ritika Rawal, a ground-level religious writer exploring Gods, Aarti traditions, Horoscope, Panchang and temple culture. I work closely with local pandits and experienced astrologers, bringing their real insights to readers. My focus is pure, authentic spiritual reporting that connects rituals with everyday faith.