Margashirsha Purnima Date 2025: कब है मार्गशीर्ष पूर्णिमा? जानें विष्णु पूजा, मंत्र जप और दान का महत्व
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर करें श्रीहरि विष्णु, चंद्रमा और लक्ष्मी जी की पूजा, जानें शुभ मंत्र जप और गंगा स्नान से कैसे पूरी होगी मनोकामना

हर साल जब नवंबर और दिसंबर की ठंडी हवाएं शरीर को भीतर तक छूने लगती हैं तब पंचांग में एक तिथि आती है मार्गशीर्ष पूर्णिमा। यह सिर्फ एक दिन नहीं होता यह वह खिड़की है जिससे धार्मिक ऊर्जा शांति और दिव्यता हमारे जीवन में प्रवेश करती है।
मैंने खुद इसे कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर में सुबह चार बजे अनुभव किया है। कानों में शंखध्वनि सामने स्नान कर रहे श्रद्धालु और हाथ में तुलसी की माला उस क्षण समझ आया कि मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व केवल शास्त्रों में नहीं अनुभव में है। इस लेख में मैं आपको वही अनुभव विधि और ज्ञान देने जा रही हूं जो सालों के अभ्यास और शोध का परिणाम है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2025 की तिथि और विशेष संयोग
तिथि प्रारंभ: 4 दिसंबर 2025 सुबह 08:37 बजे
तिथि समाप्ति: 5 दिसंबर 2025 सुबह 04:43 बजे
चंद्रोदय और पूजा का दिन: 4 दिसंबर 2025 को ही मान्य होगा क्योंकि उसी दिन पूर्णिमा तिथि में चंद्रमा का उदय हो रहा है। इसी समय चंद्रमा को अर्घ्य देना शुभ रहेगा।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व
मार्गशीर्ष जिसे ‘अगहन’ भी कहा जाता है भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय महीना माना गया है। इस महीने की पूर्णिमा विष्णु चंद्रदेव और मां लक्ष्मी तीनों की कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ अवसर देती है।
भविष्य पुराण और नारद पुराण जैसे ग्रंथों में इस तिथि को ‘कामफलदायिनी तिथि’ कहा गया है जिसका अर्थ है वह दिन जो सच्चे मन से की गई कामनाओं को फल देता है।
गंगा स्नान का अनुभव: जब पानी से पाप धुलते हैं
मुझे याद है एक बार वाराणसी में इस दिन सुबह गंगा स्नान करने गई थी। ठंड इतनी तेज़ थी कि सांस जमने लगे लेकिन गंगा जल में डुबकी लगाते ही ऐसा लगा मानो शरीर की नहीं आत्मा की धुलाई हो रही हो।
अगर आप तीर्थ तक नहीं पहुंच सकते तो घर में नहाने के पानी में कुछ बूंदें गंगाजल डालकर स्नान करें। स्नान के बाद सूर्य को जल और चंद्रमा को अर्घ्य देना बहुत फलदायी माना गया है।
भगवान विष्णु की पूजा: एक दिन से पूरे माह का पुण्य
यदि मार्गशीर्ष मास में आपने नियमित पूजन नहीं किया हो तो केवल इस दिन विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करने से पूरे माह के बराबर फल प्राप्त होता है।
- पीले वस्त्रों में श्रीहरि की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
- पंचामृत से अभिषेक करें
- तुलसी दल पीली मिठाई और फल अर्पित करें
- विष्णु सहस्रनाम या नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें
विशेष मंत्र:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
या
ॐ नमो नारायणाय
तुलसी की माला से कम से कम 108 बार जाप करें।
चंद्रमा की पूजा: मन को शीतलता देने वाला साधन
पूर्णिमा तिथि चंद्रमा से संबंधित होती है। यदि आप मानसिक रूप से अशांत हैं निर्णय लेने में कठिनाई हो रही है या अनिद्रा जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं तो इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य जरूर दें।
- चंद्रमा के दर्शन के समय
- जल दूध और सफेद पुष्प मिलाकर अर्घ्य दें
- चावल की खीर बनाकर भोग लगाएं
- शांत स्वर में ‘ॐ चंद्राय नमः’ मंत्र का 11 बार उच्चारण करें
- जल दूध और सफेद पुष्प मिलाकर अर्घ्य दें
यह अभ्यास कई बार मेरे लिए ध्यान का कार्य करता है जैसे चंद्रमा से कोई अदृश्य संवाद हो रहा हो।
मां लक्ष्मी की कृपा पाने के अनुभवी उपाय
धन की कामना रखने वाले इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा को नज़रअंदाज़ न करें। मैंने खुद कई वर्षों तक यह प्रयोग किया है और परिणाम चौंकाने वाले रहे हैं घर की आर्थिक स्थिति में अद्भुत बदलाव आए।
उपाय:
- पीतल की थाली में कमल का फूल रखें
- उस पर लक्ष्मी प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
- कमलगट्टा पीली कौड़ी और गोमती चक्र चढ़ाएं
- शुद्ध घी का दीपक जलाएं
- श्रीसूक्त का पाठ करें
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर दान का महत्व
दान केवल वस्तु देने का नाम नहीं वह एक ऊर्जा चक्र को गति देने का माध्यम है। इस दिन किए गए दान में हजारगुना फल मिलता है यह मैंने नहीं संतों से सीखा है।
- अन्न वस्त्र तांबे के बर्तन तिल और गुड़ का दान करें
- ब्राह्मण या ज़रूरतमंदों को भोजन कराएं
- किसी गौशाला में हरा चारा या धन अर्पित करें
यह दिन केवल पूजा का नहीं परिवर्तन का दिन है
मार्गशीर्ष पूर्णिमा कोई साधारण तिथि नहीं यह एक ऊर्जा द्वार है जहाँ आप अपनी इच्छाओं समस्याओं और साधना को एक साथ रखकर ब्रह्मांड के साथ जुड़ सकते हैं। यह वह दिन है जब पवित्रता नियम श्रद्धा और आस्था चारों का संगम होता है।
मेरे लिए यह दिन एक तरह की मानसिक सफाई का काम करता है एक वार्षिक रिबूट जैसा। अगर आप भी इस दिन को सिर्फ कर्मकांड समझने की बजाय आत्मिक विकास का अवसर मानेंगे तो यह तिथि आपको भी उसी तरह अनुभव देगी जैसे मुझे मिला।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं तथा लेखिका के अनुभवों पर आधारित है। किसी भी उपाय को अंतिम सत्य मानने से पहले स्वयं के विवेक और धार्मिक आस्था के अनुसार निर्णय लें। Hinduifestival.com किसी दावे की गारंटी नहीं देता।
First Published on: December 3, 2025 3:49 pm IST




