Rasraj Ji Maharaj on Ram and Hanuman Bhakti: भक्ति में भेद क्यों नहीं होना चाहिए

रसराज जी महाराज के अनुसार राम और हनुमान की भक्ति अलग नहीं है। उन्होंने भक्ति को संबंध और भाव के रूप में समझाया है

Rasraj Ji Maharaj on Ram and Hanuman Bhakti: भक्ति में भेद क्यों नहीं होना चाहिए

राम और हनुमान की भक्ति को लेकर अक्सर लोगों के मन में यह प्रश्न रहता है कि पहले किसकी उपासना की जाए   इसी विषय पर प्रसिद्ध कथावाचक और आध्यात्मिक वक्ता रसराज जी महाराज ने एक पॉडकास्ट बातचीत में ऐसा दृष्टिकोण रखा   जो भक्ति को तुलना से निकालकर संबंध और भाव की ओर ले जाता है  

उन्होंने यह बातचीत Speaking Tree YouTube चैनल पर साझा संवाद के दौरान रखी   जिसे बड़ी संख्या में श्रोता सुनते और समझते हैं   उनके अनुसार राम और हनुमान की भक्ति को अलग अलग तराजू पर तौलना ही मूल भ्रम है  

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति राम की भक्ति करता है   तो हनुमान जी की कृपा स्वतः प्राप्त हो जाती है   और यदि कोई हनुमान जी का सच्चा भक्त है   तो वह राम से कभी अलग हो ही नहीं सकता  

उनके अनुसार यह वही संबंध है   जैसा माता और पुत्र या पिता और पुत्र के बीच होता है   उन्होंने एक सरल उदाहरण के माध्यम से समझाया कि यदि किसी माता के पास जाकर उसके पुत्र की प्रशंसा की जाए   तो माता स्वयं प्रसन्न हो जाती है   

उसी प्रकार यदि राम के सामने हनुमान की महिमा गाई जाए   तो राम प्रसन्न होते हैं   और राम की प्रसन्नता में ही हनुमान का आनंद है  

मंदिर जाने की आदत पर बात करते हुए उन्होंने एक व्यावहारिक बात कही   उनके अनुसार यदि कोई हनुमान जी के मंदिर जाए   तो केवल जय हनुमान कहने के बजाय एक बार जय सियाराम कह देना चाहिए   ऐसा कहने से हनुमान जी अधिक प्रसन्न होते हैं   क्योंकि उनका पूरा अस्तित्व ही राम नाम से जुड़ा है  

इसी तरह उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर में जाकर जय हनुमान कहना भी उतना ही भावपूर्ण है   उनके अनुसार यह भक्ति का संतुलन है   जहां नाम अलग नहीं होते   बल्कि एक दूसरे में मिल जाते हैं  

अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि जब भी वे मंदिर जाते हैं   तो पहले लक्ष्मी नारायण को प्रणाम करते हैं   फिर राम दरबार के सामने बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं   उनके अनुसार उस क्षण ऐसा लगता है कि राम भी प्रसन्न हैं और हनुमान भी  

उन्होंने यह भाव रखा कि जब दोनों प्रसन्न हों   तो भक्त के जीवन में भी सहज प्रसन्नता आ जाती है   उनके अनुसार भक्ति का उद्देश्य मांगना नहीं   बल्कि जुड़ना है  

इस विषय पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई व्यक्ति राम का भक्त होकर हनुमान का भक्त न हो   ऐसा संभव नहीं है   और कोई हनुमान का भक्त होकर राम का भक्त न हो   यह भी संभव नहीं है  

उनके अनुसार हनुमान स्वयं राम नाम के निरंतर जप में लीन रहते हैं   इसलिए जो राम नाम से जुड़ता है   वह अपने आप हनुमान से जुड़ जाता है  

हनुमान जी द्वारा सूर्य को निगलने की कथा पर उन्होंने एक गहरा लेकिन सहज अर्थ रखा   उनके अनुसार इसे केवल बाल कथा या चमत्कार के रूप में देखना अधूरा है   उन्होंने समझाया कि सूर्य समय का प्रतीक है 

और इस लीला का भाव यह है कि हनुमान जी समय पर नियंत्रण का संकेत देते हैं  

उन्होंने यह भी कहा कि हनुमान जी सूर्य के शिष्य थे और सूर्य से उन्होंने ज्ञान प्राप्त किया   इस कथा के माध्यम से उन्होंने गुरु और शिष्य के संबंध   अनुशासन और समर्पण का भाव समझाया  

रामायण के विभिन्न संस्करणों पर बात करते हुए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि हर रामायण में हर प्रसंग का उल्लेख होना आवश्यक नहीं है   वाल्मीकि रामायण   रामचरित मानस और अन्य परंपराओं में कथाएं अलग अलग रूपों में मिलती हैं  

उनके अनुसार किसी कथा का एक ग्रंथ में न होना   उसके अस्तित्व को नकारता नहीं है   यह भारतीय परंपरा की व्यापकता और गहराई को दर्शाता है  

आज के समय में जब लोग भक्ति को भी तुलना और वर्गों में बांटने लगते हैं   उन्होंने जो बात कही   वह जोड़ने वाली है   उनके अनुसार सनातन परंपरा की सुंदरता यही है कि यहां भक्ति प्रतिस्पर्धा नहीं   समर्पण है  

रसराज जी महाराज के अनुसार राम और हनुमान की भक्ति को अलग देखना स्वयं भक्ति के भाव को सीमित करना है   जब भक्त इस भेद से बाहर आता है   तब भक्ति स्वाभाविक हो जाती है  

उनकी यह दृष्टि भक्ति को डर और नियम से निकालकर प्रेम और संबंध में बदल देती है  

Disclaimer : यह लेख रसराज जी महाराज द्वारा सार्वजनिक रूप से साझा किए गए विचारों   प्रवचनों और पॉडकास्ट चर्चाओं के संदर्भ में तैयार किया गया है   hinduifestival.com किसी भी धार्मिक अनुभव या परिणाम की गारंटी नहीं देता   यह सामग्री केवल सूचना और चिंतन के उद्देश्य से प्रस्तुत है  



TOPICS hanuman Religion

First Published on: December 16, 2025 4:20 pm IST

About the Author: Suhani Chauhan

I am Suhani Chauhan, a Religion and Hindu Calendar researcher at Hinduifestival.com, specializing in Hindu festivals, Panchang, and tithi systems. I study classical scriptures, traditional Panchang methods, and astronomical principles to understand sacred timekeeping. My work explains how lunar and solar cycles shape religious dates and rituals across India. I aim to present Hindu calendar knowledge in a clear, accurate, and trustworthy way for modern reader