Shakambhari Navratri 2025: मां शाकंभरी की पूजा कब और कैसे करें, जानिए पूरा महत्व
Shakambhari Navratri 2025 पौष मास में मनाई जाती है। जानिए मां शाकंभरी की पूजा तिथि, महत्व, पूजा विधि और शारदीय नवरात्रि से इसका अंतर

जब जीवन की हर दिशा में कृत्रिमता और व्यस्तता हावी हो जाती है तब कुछ पर्व हमें प्रकृति की गोद में लौटने की प्रेरणा देते हैं शाकंभरी नवरात्रि ऐसा ही एक उत्सव है जिसमें देवी का वह स्वरूप पूजित होता है जो जीवन की मूलभूत आवश्यकता भोजन फल वनस्पति की अधिष्ठात्री हैं
शाकंभरी नवरात्रि क्या है?
शाकंभरी देवी मां दुर्गा का एक विशिष्ट रूप हैं जिनकी उत्पत्ति उस समय मानी जाती है जब पृथ्वी पर घोर दुर्भिक्ष पड़ा था नदियाँ सूख गई थीं अन्न का दाना तक नहीं बचा था तब आदिशक्ति ने शाकंभरी स्वरूप में अवतार लिया और अपने शरीर से अन्न फल सब्जियाँ और जल उत्पन्न किया यह केवल पौराणिक आख्यान नहीं बल्कि उस स्त्री शक्ति का बिंब है जो जीवन को पोषित करती है
शाकंभरी नवरात्रि 2025 की तिथि
- आरंभ: 28 दिसंबर 2025 (पौष शुक्ल अष्टमी)
- समापन: 3 जनवरी 2026 (पौष पूर्णिमा)
यह नवरात्रि आठ दिन तक चलती है और इसका समापन शाकंभरी पूर्णिमा पर विशेष पूजा और भंडारे के साथ होता है
यह नवरात्रि अन्य नवरात्रियों से कैसे अलग है?
| आधार | शारदीय नवरात्रि | शाकंभरी नवरात्रि |
| तिथि | आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी | पौष शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा |
| देवी स्वरूप | माँ दुर्गा के नव रूप | माँ शाकंभरी (वनस्पति की देवी) |
| पूजा का स्वरूप | पारंपरिक वैदिक- सांस्कृतिक | तांत्रिक -प्राकृतिक उपासना |
| प्रमुख क्षेत्र | उत्तर भारत बंगाल | राजस्थान कर्नाटक महाराष्ट्र |
| उद्देश्य | शक्ति और विजय की साधना | पोषण जीवन और अन्न की साधना |
तांत्रिक और ज्योतिषीय महत्व
पौष शुक्ल पक्ष में चंद्रमा की स्थिति सकारात्मक ऊर्जा और संवेदनशीलता को बढ़ाती है इस काल में देवी की उपासना तांत्रिक साधनाओं के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है ज्योतिष के अनुसार:
- पूर्णिमा तिथि को चंद्रमा पूर्ण भाव में होता है जो मन और पोषण का कारक है
- शुक्र ग्रह यदि इस समय शुभ स्थान पर हो तो देवी शाकंभरी की कृपा से घर में अन्न वैभव और संतोष का वास होता है
- तुला कर्क और वृष राशि वालों के लिए यह काल विशेष फलदायक माना गया है
कैसे करें शाकंभरी देवी की पूजा?
- कलश स्थापना करें देवी को नीले पुष्प प्रिय होते हैं
- फल सब्जी अन्न और वनस्पति से भोग सजाएं यह पूजा की मूल भावना है
- शाकंभरी अष्टकम या शाकंभरी स्तोत्र का पाठ करें
- हर दिन एक नई वनस्पति का भोग अर्पित करें यह साधना को सात्विक बनाता है
मेरी दादी की अनुभूति: “अन्न की देवी जब घर में आती हैं…”
मेरे गांव में एक परंपरा है शाकंभरी नवरात्रि में हर दिन कोई न कोई फल या सब्जी देवी को अर्पित की जाती है और फिर उसी से पूरे परिवार का भोजन बनता है मेरी दादी हमेशा कहती थीं “जिस घर में शाकंभरी देवी को भाव से पूजते हैं वहाँ कभी रसोई खाली नहीं रहती “
आधुनिक सन्दर्भ में शाकंभरी नवरात्रि की प्रासंगिकता
आज जब भोजन भी बाजार का उत्पाद बन चुका है शाकंभरी नवरात्रि हमें स्मरण कराती है कि अन्न केवल पेट भरने का साधन नहीं ईश्वरीय अनुकंपा है यह पर्व सस्टेनेबिलिटी लोकल फूड और हरित जीवन के मूल्यों को साकार करता है
देवी नहीं प्रकृति का साक्षात आभार
शाकंभरी नवरात्रि केवल देवी पूजन नहीं यह हमारी भोजन संस्कृति प्राकृतिक संसाधनों और स्त्रीत्व के पोषण स्वरूप का उत्सव है जब हम इस पर्व को श्रद्धा प्रकृति और सात्विकता के साथ मनाते हैं तब देवी शाकंभरी स्वयं हमारे आंगन को समृद्ध कर देती हैं
First Published on: December 12, 2025 3:00 pm IST




