Friday Lakshmi Puja: क्यों हर शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा को माना जाता है शुभ

Friday Lakshmi Puja को लेकर धार्मिक मान्यताएं क्या कहती हैं। जानिए क्यों शुक्रवार की शाम मां लक्ष्मी की पूजा को विशेष माना जाता है

Friday Lakshmi Puja: क्यों हर शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा को माना जाता है शुभ

शुक्रवार आते ही कई घरों की रफ्तार अपने आप बदल जाती है   काम वही रहता है  जिम्मेदारियां भी कम नहीं होतीं  लेकिन शाम होते-होते घर में एक अलग सा ठहराव आ जाता है   

दीये की लौ थोड़ी देर तक देखी जाती है  पूजा की थाली जल्दी-जल्दी नहीं सजाई जाती   यही वह समय है जब मां लक्ष्मी की पूजा की परंपरा सिर्फ एक धार्मिक कर्म नहीं  बल्कि घर की स्मृति और अनुशासन बन जाती है  

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार  शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित माना गया है   लेकिन इस पूजा को समझने के लिए सिर्फ मान्यता जान लेना काफी नहीं होता   यह जानना भी ज़रूरी है कि लोग सदियों से इसे क्यों निभाते आए हैं  

कई परंपराओं में यह कहा जाता है कि लक्ष्मी पूजा शाम के समय की जाती है   इसके पीछे तर्क कम  अनुभव ज़्यादा हैं   दिन की भागदौड़ के बाद जब घर थोड़ा शांत होता है  तब किया गया पूजन मन को भी उसी शांति में ले आता है  

शाम का दीपक केवल रोशनी नहीं देता  वह दिनभर की उलझनों को थोड़ी देर के लिए किनारे रखने का बहाना भी बनता है   शायद इसी वजह से लोक परंपराओं में यह माना गया कि मां लक्ष्मी उसी घर में रुकती हैं  जहां ठहराव और संतुलन हो  

शुक्रवार की लक्ष्मी पूजा में बहुत भारी-भरकम विधियों की बात नहीं मिलती   साफ जगह  शांत मन और थोड़ी सी नियमितता   बस इतना ही  

फूल कौन सा है  धूप कौन सी है  इससे ज़्यादा अहम यह माना गया कि पूजा करते समय मन में जल्दबाज़ी न हो   कई लोग इत्र या हल्की खुशबू चढ़ाते हैं  क्योंकि सुगंध को मन की अवस्था से जोड़कर देखा जाता है  

यह पूजा दिखावे से नहीं  निरंतरता से जुड़ी हुई मानी जाती है  

शुक्रवार के साथ कुछ सामाजिक व्यवहार भी जुड़े हुए हैं   जैसे उधार का लेन-देन न करना   इसे केवल धन से नहीं  बल्कि मानसिक अस्थिरता से जोड़कर देखा गया   माना गया कि इस दिन आर्थिक तनाव को न्योता नहीं देना चाहिए  

इसी तरह  महिलाओं या किसी भी व्यक्ति का अपमान न करना   यह नियम किसी डर से नहीं  बल्कि सम्मान की उस परंपरा से जुड़ा है  जहां लक्ष्मी को सम्मान और मर्यादा का प्रतीक माना गया  

घर की सफाई का ज़िक्र भी अक्सर आता है   गंदगी को यहां सिर्फ भौतिक नहीं  बल्कि अव्यवस्था का संकेत माना गया  

लक्ष्मी पूजा को अक्सर सिर्फ पैसे से जोड़ दिया जाता है  लेकिन परंपराओं में इसका अर्थ कहीं व्यापक है   लक्ष्मी को वहां टिकने वाला बताया गया है  जहां स्थिरता  संयम और विवेक हो  

इसलिए कई लोग मानते हैं कि अगर धन आता है लेकिन चैन नहीं रहता  तो वह लक्ष्मी की कृपा नहीं मानी जाती   शुक्रवार की पूजा व्यक्ति को अपने जीवन की लय पर फिर से ध्यान देने का मौका देती है  

लक्ष्मी आरती को सिर्फ गाने की तरह नहीं देखा गया   यह घर और आस्था के बीच एक संवाद की तरह रही है   शब्द वही रहते हैं  लेकिन हर घर में उनका भाव थोड़ा अलग होता है  

कई घरों में आरती के बाद कुछ देर चुपचाप बैठने की परंपरा भी है   जैसे पूजा का असर तुरंत शब्दों में नहीं  बल्कि मौन में उतरता हो  

शुक्रवार की लक्ष्मी पूजा कोई चमत्कारी उपाय नहीं है   यह एक धीमी  सधी हुई परंपरा है  जो व्यक्ति को हर हफ्ते यह याद दिलाती है कि समृद्धि सिर्फ कमाने से नहीं आती  उसे संभालने का स्वभाव भी चाहिए  

शायद इसी वजह से यह परंपरा आज भी कई घरों में बिना शोर के निभाई जाती है   ठीक उसी तरह  जैसे मां लक्ष्मी को भी शांति पसंद बताई गई है  

Disclaimer : यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोकविश्वासों पर आधारित है।
Hinduifestival.com किसी भी धार्मिक परंपरा के चमत्कारी या वैज्ञानिक परिणाम का दावा नहीं करता।



TOPICS Laxmi Religion

First Published on: December 19, 2025 6:21 pm IST

About the Author: Suhani Chauhan

I am Suhani Chauhan, a Religion and Hindu Calendar researcher at Hinduifestival.com, specializing in Hindu festivals, Panchang, and tithi systems. I study classical scriptures, traditional Panchang methods, and astronomical principles to understand sacred timekeeping. My work explains how lunar and solar cycles shape religious dates and rituals across India. I aim to present Hindu calendar knowledge in a clear, accurate, and trustworthy way for modern reader