हमें व्रत क्यों रखना चाहिए? जानिए Hare Krishna TV के वीडियो में प्रशांत मुकुंद प्रभु क्या कहते हैं

Hare Krishna TV पर प्रसारित एक वीडियो में प्रशांत मुकुंद प्रभु ने व्रत को लेकर उठते सवालों पर अपनी राय रखी और इसके विभिन्न पहलुओं पर बात की

हमें व्रत क्यों रखना चाहिए? जानिए Hare Krishna TV के वीडियो में प्रशांत मुकुंद प्रभु क्या कहते हैं

भारतीय समाज में व्रत एक परिचित परंपरा है   लेकिन उससे जुड़ा एक सवाल बार-बार उठता है क्या ईश्वर सच में चाहता है कि मनुष्य भोजन त्याग कर स्वयं को कष्ट में डाले  


इसी प्रश्न से शुरुआत होती है Hare Krishna TV पर प्रसारित एक वीडियो प्रवचन की   जिसमें वैष्णव परंपरा से जुड़े वक्ता प्रशांत मुकुंद प्रभु ने व्रत की अवधारणा को अलग-अलग स्तरों पर देखने की बात कही  

उनके अनुसार   व्रत को केवल भूखे रहने की प्रक्रिया मान लेना उसकी मूल भावना को सीमित कर देता है   उन्होंने वीडियो के दौरान यह संकेत दिया कि यह विषय केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है   बल्कि इसमें शरीर   मन और भावनाओं से जुड़े पहलू भी शामिल हैं  

बातचीत के दौरान उन्होंने आधुनिक विज्ञान का उल्लेख करते हुए कहा कि आज स्वास्थ्य को लेकर जिन बातों पर चर्चा होती है   उनमें भोजन से विराम देने की अवधारणा नई नहीं है

  
उनके अनुसार   जब व्यक्ति लगातार भारी और नियमित भोजन करता रहता है   तो शरीर पर उसका दबाव बढ़ता है   ऐसे में समय-समय पर हल्का आहार या फलाहार शरीर को संतुलन की स्थिति में लौटने का अवसर देता है  

उन्होंने यह बात जोर देकर कही कि यह तर्क व्रत को चमत्कारिक इलाज की तरह पेश करने के लिए नहीं है   बल्कि शरीर को विश्राम देने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया के रूप में समझाने का प्रयास है  

वीडियो में उन्होंने आयुर्वेदिक दृष्टि का भी हवाला दिया 
उनके अनुसार   आयुर्वेद स्वास्थ्य को दवाओं से अधिक जीवनशैली से जोड़कर देखता है   संयम   नियमित चलना   सूर्य प्रकाश का सेवन   सीमित व्यायाम और भोजन में अंतर इन सबको उन्होंने शरीर की शुद्धि से जुड़ी क्रियाएं बताया  

उन्होंने यह भी कहा कि आयुर्वेद में लंघन को दंड या तपस्या की तरह नहीं   बल्कि शरीर को साफ करने की एक प्रक्रिया के रूप में देखा गया है  

प्रवचन के दौरान उन्होंने एक व्यावहारिक उदाहरण का सहारा लिया 

 उनके अनुसार   जैसे किसी मशीन को लगातार चलाने के बजाय समय-समय पर बंद कर उसकी सर्विसिंग की जाती है   वैसे ही पाचन तंत्र को भी कभी-कभी विश्राम की आवश्यकता होती है  

उन्होंने यह तुलना केवल समझाने के लिए दी   न कि किसी वैज्ञानिक निष्कर्ष के रूप में  

प्रशांत मुकुंद प्रभु ने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ग्रंथों में तपस्या के कई रूप बताए गए हैं  


उनके अनुसार   आहार संयम को भी तपस्या के एक रूप के तौर पर देखा गया है   लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट किया कि शास्त्र तपस्या को तभी सार्थक मानते हैं जब उसका उद्देश्य आत्मशुद्धि और ईश्वर-स्मरण हो  

उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि व्रत या उपवास केवल अपनी इच्छाओं की पूर्ति या किसी दबाव के लिए किया जाए   तो उसका आध्यात्मिक अर्थ समाप्त हो जाता है  

वीडियो में उन्होंने उपवास शब्द के अर्थ पर भी बात की 
उनके अनुसार   उपवास का आशय केवल अन्न त्याग नहीं है   बल्कि ईश्वर के समीप रहने की मानसिक स्थिति है  

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति भोजन तो छोड़ दे   लेकिन दिन भर सांसारिक गतिविधियों में डूबा रहे   तो वह व्रत की भावना से दूर रहता है  

प्रवचन के एक हिस्से में उन्होंने भावनात्मक उदाहरण के माध्यम से अपनी बात रखी 
उनके अनुसार   जब मन किसी प्रिय व्यक्ति या उद्देश्य में पूरी तरह लीन हो जाता है   तो भोजन जैसी आवश्यकताएं अपने आप पीछे चली जाती हैं  

उन्होंने यह उदाहरण यह समझाने के लिए दिया कि व्रत केवल शरीर की क्रिया नहीं   बल्कि मन की अवस्था भी है  

प्रशांत मुकुंद प्रभु के अनुसार   व्रत को डर   मजबूरी या सामाजिक दबाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए 
उनके शब्दों में   यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो यदि समझ के साथ अपनाई जाए   तो व्यक्ति को शारीरिक संतुलन   मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक संवेदनशीलता की ओर ले जा सकती है  

उन्होंने यह बात भी कही कि हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है और किसी भी धार्मिक आचरण को अपनाते समय विवेक आवश्यक है  

यह वीडियो Hare Krishna TV पर प्रसारित किया गया   जो वैष्णव परंपरा से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है   इस चैनल के लगभग 4.71 मिलियन सब्सक्राइबर हैं और यह नियमित रूप से ऐसे धार्मिक संवाद प्रस्तुत करता है   जिनमें आस्था के साथ-साथ विचार का स्थान भी दिया जाता है  

Source Link https://www.youtube.com/watch?v=wud7hm03nhk

Disclaimer : यह लेख Hare Krishna TV पर प्रसारित वीडियो प्रवचन के आधार पर तैयार किया गया एक स्वतंत्र संपादकीय अवलोकन है   इसमें व्यक्त विचार वक्ता के हैं और इन्हें धार्मिक संवाद के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है   पाठकों से अपेक्षा है कि वे किसी भी धार्मिक या स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले व्यक्तिगत विवेक और परिस्थिति का ध्यान रखें  



TOPICS Religion

First Published on: December 18, 2025 10:37 pm IST

About the Author: Suhani Chauhan

I am Suhani Chauhan, a Religion and Hindu Calendar researcher at Hinduifestival.com, specializing in Hindu festivals, Panchang, and tithi systems. I study classical scriptures, traditional Panchang methods, and astronomical principles to understand sacred timekeeping. My work explains how lunar and solar cycles shape religious dates and rituals across India. I aim to present Hindu calendar knowledge in a clear, accurate, and trustworthy way for modern reader