आज का पंचांग 4 मार्च 2026: बुधवार की तिथि, नक्षत्र, राहुकाल और ग्रह गोचर की पूरी जानकारी

आज का पंचांग 4 मार्च 2026: प्रतिपदा तिथि, नक्षत्र परिवर्तन, राहुकाल, शुभ चौघड़िया और चंद्र राशि गोचर का पूरा विवरण जानें।

आज का पंचांग 4 मार्च 2026: बुधवार की तिथि, नक्षत्र, राहुकाल और ग्रह गोचर की पूरी जानकारी

4 मार्च 2026 बुधवार का दिन पंचांग की दृष्टि से परिवर्तनशील है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से द्वितीया की ओर बढ़ता यह दिन नक्षत्र और चंद्र राशि परिवर्तन के कारण विशेष महत्व रखता है। बसंत ऋतु का प्रभाव स्पष्ट है और समय संरचना कई स्तरों पर गतिशील दिखाई देती है।

विक्रम संवत 2082
शक संवत 1947
अयन उत्तरायण
ऋतु बसंत
मास चैत्र प्रारंभ
पक्ष कृष्ण पक्ष प्रारंभ

प्रतिपदा तिथि दिन 4 बजकर 49 मिनट तक रहेगी इसके बाद द्वितीया तिथि आरंभ होगी। यह परिवर्तन चंद्र पक्ष के अगले चरण की शुरुआत को दर्शाता है।

प्रतिपदा तिथि का समापन दोपहर बाद होगा। तिथि चंद्रमा की सूर्य से दूरी पर आधारित इकाई है और यही पंचांग की मूल दैनिक परत बनाती है।

दोपहर के बाद द्वितीया तिथि शुरू होगी जिससे दिन का दूसरा चरण प्रारंभ माना जाएगा।

पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र प्रातः 7 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। इसके बाद उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र प्रभावी होगा।

नक्षत्र परिवर्तन को पंचांग में इसलिए महत्व दिया जाता है क्योंकि यह चंद्रमा की पृष्ठभूमि बदलने का संकेत है जिससे दिन की ऊर्जा संरचना में सूक्ष्म बदलाव माना जाता है।

धृति योग सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक रहेगा उसके बाद शूल योग का प्रभाव प्रारंभ होगा।

करण की दृष्टि से कौलव करण 4 बजकर 49 मिनट तक रहेगा उसके बाद तैतिल करण आरंभ होगा। योग और करण दोनों तिथि की सूक्ष्म गणनात्मक इकाइयाँ हैं।

राहुकाल दोपहर 12 बजे से 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। परंपरागत दृष्टि में इस समय को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।

महत्वपूर्ण कार्यों की योजना सुबह या राहुकाल के बाद करना पारंपरिक रूप से उचित समझा जाता है।

सुबह लाभ और अमृत चौघड़िया उपलब्ध रहेंगे। दोपहर से पहले सीमित अवधि का शुभ चौघड़िया रहेगा।

संध्या से पहले चर और लाभ चौघड़िया पुनः उपलब्ध होंगे। चौघड़िया प्रणाली दिन को आठ भागों में विभाजित करती है ताकि समय चयन सरल हो सके।

आज उत्तर दिशा में दिशा शूल माना गया है। यात्रा योजना बनाते समय पंचांग में इस संदर्भ का उल्लेख किया जाता है।

यह विचार प्रतीकात्मक है और पारंपरिक समय संरचना का हिस्सा है।

चंद्रमा दोपहर 1 बजकर 46 मिनट तक सिंह राशि में रहेगा। इसके बाद कन्या राशि में प्रवेश करेगा।

सिंह राशि में चंद्रमा आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति से जुड़ा माना जाता है जबकि कन्या राशि में विश्लेषण और सूक्ष्मता का संकेत प्रबल होता है।

रात्रि में सूर्य का पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश होगा।
सायंकाल शुक्र का उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश होगा।

ग्रहों का नक्षत्र परिवर्तन दीर्घकालिक ज्योतिषीय गणना में महत्वपूर्ण माना जाता है।

आज बसंतोत्सव से जुड़े आयोजन प्रारंभ माने जाते हैं। कुछ स्थानों पर पारंपरिक मेलों और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है।

होली से पूर्व का यह समय सांस्कृतिक संक्रमण काल के रूप में देखा जाता है।

4 मार्च 2026 का दिन तिथि नक्षत्र और राशि परिवर्तन के कारण गतिशील है। राहुकाल दोपहर में रहेगा इसलिए महत्वपूर्ण कार्यों के लिए सुबह का समय अपेक्षाकृत अनुकूल माना जाता है।

यह दिन चैत्र मास के आरंभ और बसंत ऋतु की लय को दर्शाता है जहाँ पंचांग की विभिन्न परतें एक साथ सक्रिय रहती हैं।

अस्वीकरण: यह पंचांग जानकारी पारंपरिक गणनाओं पर आधारित है। स्थान समय और परंपरा के अनुसार तिथि व मुहूर्त में अंतर संभव है। महत्वपूर्ण कार्य से पहले स्थानीय पंचांग या विशेषज्ञ से पुष्टि करें।



TOPICS Panchang

First Published on: March 3, 2026 12:33 pm IST

About the Author: Ritika Rawal

I am Ritika Rawal, a ground-level religious writer exploring Gods, Aarti traditions, Horoscope, Panchang and temple culture. I work closely with local pandits and experienced astrologers, bringing their real insights to readers. My focus is pure, authentic spiritual reporting that connects rituals with everyday faith.