Aaj Ka Panchang 25 February 2026: क्या आज का दिन शुभ है? जानें राहुकाल, चौघड़िया, तिथि-नक्षत्र

क्या 25 फरवरी 2026 का दिन नए काम शुरू करने के लिए सही है? जानें आज का पंचांग, राहुकाल, चौघड़िया, तिथि, नक्षत्र और शुभ समय

Aaj Ka Panchang 25 February 2026: क्या आज का दिन शुभ है? जानें राहुकाल, चौघड़िया, तिथि-नक्षत्र

सुबह का समय था हल्की ठंड अभी पूरी तरह गई नहीं है और बसंत का एहसास साफ दिखने लगा है। ऐसे दिनों में पंचांग देखना केवल परंपरा नहीं लगता बल्कि दिन की लय समझने जैसा लगता है। बुधवार 25 फरवरी 2026 का दिन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ रहा है इसलिए वातावरण में एक अलग-सी उत्सवी तैयारी भी मानी जाती है। कई जगहों पर होली के पूर्व संकेत शुरू हो जाते हैं और धार्मिक गतिविधियाँ धीरे-धीरे तेज होने लगती हैं।

आज का दिन उन लोगों के लिए खास माना जाता है जो अपने काम समय देखकर शुरू करना पसंद करते हैं। व्यापार यात्रा नए कार्य पूजा या कोई महत्वपूर्ण निर्णय  पंचांग इन सब के लिए एक संदर्भ देता है जैसे समय का नक्शा।

विक्रम संवत 2082
शक संवत 1947
मास फाल्गुन
पक्ष शुक्ल
ऋतु बसंत
अयन उत्तरायण

फाल्गुन शुक्ल पक्ष को पारंपरिक रूप से उल्लास का समय माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह काल भक्ति और उत्सव दोनों का संगम होता है।

आज शुक्ल नवमी तिथि देर रात तक प्रभावी रहेगी उसके बाद दशमी तिथि आरंभ होगी। नवमी को सामान्यतः स्थिरता और विस्तार से जुड़े कार्यों के लिए संतुलित माना जाता है।

नक्षत्र  रोहिणी दोपहर तक उसके बाद मृगशिरा
रोहिणी नक्षत्र को सृजन और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि कई प्राचीन ग्रंथों में रोहिणी को चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र कहा गया है इसलिए चंद्रमा की स्थिति आज मनोभावों पर भी प्रभाव डाल सकती है।

योग  विष्कुम्भ के बाद प्रीति योग
विष्कुम्भ योग को कुछ कार्यों में बाधा देने वाला माना जाता है जबकि उसके बाद आने वाला प्रीति योग संबंधों और सहयोग के लिए अनुकूल समझा जाता है। तकनीकी रूप से देखें तो योग सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त गति से निकलता है इसलिए यह दिन की सूक्ष्म ऊर्जा का संकेतक माना जाता है।

सुबह के प्रारंभिक चौघड़ियों में लाभ और अमृत काल के कारण शुभ कार्य शुरू किए जा सकते हैं। दोपहर के आसपास का समय सामान्य रहेगा जबकि शाम के बाद फिर से अनुकूलता बढ़ेगी।

पंचांग में चौघड़िया का महत्व इसलिए है क्योंकि यह दिन को छोटे-छोटे समय खंडों में विभाजित कर देता है। पुराने समय में जब घड़ी हर किसी के पास नहीं होती थी तब इसी आधार पर यात्रा या व्यापार शुरू किया जाता था। आज भी कई लोग वाहन खरीदना या नया काम शुरू करने से पहले इसे देखते हैं।

राहुकाल  दोपहर के समय
इस अवधि में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की परंपरा है।

दिशा शूल  उत्तर दिशा
यदि आज उत्तर दिशा में यात्रा करनी हो तो पारंपरिक उपाय करने की सलाह दी जाती है। दिलचस्प बात यह है कि दिशा शूल की अवधारणा केवल धार्मिक नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक भी हो सकती है  यात्रा से पहले सावधानी और मानसिक तैयारी का एक तरीका।

(यहाँ थोड़ा विषय से हटकर पर हमेशा लगता है कि पुराने पंचांगकार समय और दिशा को जोड़कर जीवन को व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहे थे जैसे आज हम कैलेंडर ऐप्स और रिमाइंडर से करते हैं। अंतर बस इतना है कि तब इसमें ग्रह और नक्षत्र भी शामिल थे।)

चंद्रमा आज वृष राशि से मिथुन राशि की ओर गति करेगा।
वृष में चंद्रमा स्थिरता और भौतिक सुखों से जुड़ा माना जाता है जबकि मिथुन में प्रवेश के बाद विचार और संवाद की प्रवृत्ति बढ़ती है।

आज कई ग्रह एक ही राशि में होने के कारण ग्रह समूह योग बन रहा है जो सामाजिक संपर्क बातचीत और योजनाओं पर प्रभाव डाल सकता है। ज्योतिषीय गणना में इसे ऊर्जा का संकेंद्रण माना जाता है।

आज कुछ स्थानों पर फाल्गुन नवमी से जुड़े उत्सवों की शुरुआत मानी जाती है। ब्रज क्षेत्र में होली के प्रारंभिक आयोजन भी इसी समय से जुड़ते हैं। जैन परंपरा में भी आज का दिन व्रत से संबंधित माना जाता है।

आज जन्म लेने वाले बच्चों की राशि समय के अनुसार वृष या मिथुन मानी जाएगी।
नामाक्षर परंपरा के अनुसार कुछ विशेष अक्षरों से नाम रखने की सलाह दी जाती है। यह प्रथा मुख्यतः नक्षत्र आधारित है और भारत के कई हिस्सों में आज भी अपनाई जाती है।

वृष राशि से जुड़े गुणों में धैर्य और कलात्मकता बताए जाते हैं जबकि मिथुन राशि से जुड़े गुणों में चतुरता और संवाद कौशल का उल्लेख मिलता है।

दिन का पंचांग केवल शुभ-अशुभ बताने के लिए नहीं होता बल्कि समय को समझने की एक पारंपरिक प्रणाली है। आधुनिक जीवन में हम इसे मानें या न मानें पर यह सच है कि इससे दिन के प्रति एक सजगता आती है  जैसे आप बिना देखे भी जानते हों कि आज का दिन सामान्य नहीं है कुछ अलग है बस शब्दों में नहीं कह पा रहे।

विवरणजानकारी
दिनबुधवार
मासफाल्गुन
पक्षशुक्ल पक्ष
तिथिनवमी (रात्रि तक) बाद में दशमी
नक्षत्ररोहिणी (दोपहर तक) फिर मृगशिरा
योगविष्कुम्भ बाद में प्रीति
करणबालव बाद में कौलव
सूर्योदयप्रातः लगभग 06:50 बजे
सूर्यास्तसायं लगभग 06:18 बजे
चंद्र राशिवृष बाद में मिथुन
राहुकालदोपहर (लगभग 12:30  02:00 बजे)
गुलिक कालपूर्वाह्न
यमगण्डप्रातः
दिशा शूलउत्तर दिशा
शुभ चौघड़ियासुबह और शाम के कुछ समय
व्रत / विशेषफाल्गुन नवमी होली पूर्व संकेत

अस्वीकरण:  यह जानकारी पारंपरिक पंचांग गणना, धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य सांस्कृतिक जानकारी प्रदान करना है, न कि किसी प्रकार की वैज्ञानिक या अनिवार्य सलाह देना।



TOPICS Panchang

First Published on: February 25, 2026 12:24 pm IST

About the Author: Ritika Rawal

I am Ritika Rawal, a ground-level religious writer exploring Gods, Aarti traditions, Horoscope, Panchang and temple culture. I work closely with local pandits and experienced astrologers, bringing their real insights to readers. My focus is pure, authentic spiritual reporting that connects rituals with everyday faith.