Shukra Pradosh 2026: 16 या 17 जनवरी सही तारीख़ पंचांग क्या बताता है

शुक्र प्रदोष 2026 की तारीख़ को लेकर 15 या 16 जनवरी का भ्रम क्यों है? जानिए पंचांग के अनुसार कौन-सा दिन मान्य माना जाता है

Shukra Pradosh 2026: 16 या 17 जनवरी सही तारीख़ पंचांग क्या बताता है

जनवरी 2026 में जब लोग शुक्र प्रदोष की तारीख़ देखते हैं  तो अलग-अलग कैलेंडरों में अलग दिन दिखने लगता है।

 कहीं 15 जनवरी लिखा होता है  कहीं 16  और कहीं-कहीं 17 भी।

इससे यह सवाल उठता है कि  पंचांग के हिसाब से सही दिन कौन-सा माना जाना चाहिए ?

अधिकांश पारंपरिक पंचांगों में  जनवरी 2026 के संदर्भ में  शुक्रवार  16 जनवरी को शुक्र प्रदोष के रूप में दर्शाया गया है।  यह निर्धारण त्रयोदशी तिथि और सूर्यास्त के समय के मेल पर आधारित होता है।

अंग्रेज़ी कैलेंडर दिन को रात 12 बजे से गिनता है  लेकिन पंचांग में तिथि चंद्रमा और सूर्य की स्थिति से बदलती है।

प्रदोष व्रत के लिए आम तौर पर यह देखा जाता है कि  सूर्यास्त के बाद के समय में त्रयोदशी तिथि मौजूद है या नहीं।

माघ मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी15 जनवरी 2026 की रात लगभग 8:16 बजे शुरू मानी जाती है
और  16 जनवरी 2026 की रात करीब 10:21 बजे समाप्त मानी जाती है।

दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लिए   16 जनवरी की शाम का सूर्यास्त इसी तिथि के भीतर पड़ता हुआ दर्शाया जाता है   इसी आधार पर कई पंचांग इस दिन को शुक्र प्रदोष के रूप में बताते हैं।

क्योंकि कुछ कैलेंडर  तिथि की शुरुआत वाली तारीख़ दिखाते हैं   और कुछ उसके समाप्त होने वाली।

जब कोई तिथि रात में शुरू होकर अगले दिन रात में खत्म होती है  तो अलग-अलग कैलेंडरों में उसका दिन अलग दिख सकता है।  प्रदोष के मामले में आम तौर पर सूर्यास्त के समय को आधार बनाया जाता है  इसलिए तारीख़ें अलग लग सकती हैं।

प्रदोष व्रत हर महीने दो बार आता है। जब वह सोमवार को पड़ता है तो सोम प्रदोष
शनिवार को शनि प्रदोष और शुक्रवार को शुक्र प्रदोष कहा जाता है।

यह नामकरण सप्ताह के दिन से जुड़ा हुआ होता है  न कि किसी अलग ग्रंथीय तिथि से।

लोकमान्यताओं में शुक्रवार को शुक्र ग्रह से जोड़ा जाता है   जिसे संबंधों  सौंदर्य और संतुलन से जोड़ा जाता है। इसी वजह से शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष को कुछ लोग विशेष मानते हैं।हालांकि ग्रंथों में प्रदोष व्रत का मूल संबंधशिव से जुड़ी परंपरा से ही माना जाता है।

जनवरी 2026 के मामले में  कई पंचांगों में यह देखा जाता है कि शुक्रवार 16 जनवरी की शाम के समय त्रयोदशी तिथि पड़ रही होती है  

 और इसी आधार पर वह दिन शुक्र प्रदोष के रूप में दर्शाया जाता है।

अलग-अलग कैलेंडरों में दिखने वाला तारीख़ का फर्क
पंचांग की तिथि-आधारित गणना और आधुनिक कैलेंडर की तारीख़-आधारित गणना के अंतर से जुड़ा है।

डिस्क्लेमर : यह लेख धार्मिक ग्रंथों  लोकविश्वासों और सामान्य पंचांग-आधारित जानकारी पर आधारित है।
यहां दी गई तिथियां और समय केवल समझ और संदर्भ के लिए हैं।
Hinduifestival.com इनकी पूर्ण सटीकता या किसी विशेष पंचांग से मेल की गारंटी नहीं देता।
कृपया अपने क्षेत्र के पंचांग या विश्वसनीय स्रोत से स्वयं पुष्टि करें।
आस्था और मान्यताएं व्यक्ति-विशेष के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।



TOPICS Hindu Calendar Religion

First Published on: January 15, 2026 8:30 pm IST

About the Author: Ritika Rawal

I am Ritika Rawal, a ground-level religious writer exploring Gods, Aarti traditions, Horoscope, Panchang and temple culture. I work closely with local pandits and experienced astrologers, bringing their real insights to readers. My focus is pure, authentic spiritual reporting that connects rituals with everyday faith.