Bhanu Saptami 2026: 24 या 25 जनवरी? पंचांग और हिंदू कैलेंडर के अनुसार भानु सप्तमी कब है और क्यों मनाई जाती है
भानु सप्तमी 2026 को लेकर तारीख़ का भ्रम क्यों है? यह लेख बताता है सही दिन, पंचांग आधार और सूर्य सप्तमी का महत्व

जनवरी 2026 के आख़िरी सप्ताह में पंचांग देखने वालों के सामने एक सामान्य-सा लेकिन महत्वपूर्ण सवाल आता है
भानु सप्तमी 24 जनवरी को है या 25 जनवरी को?
कई कैलेंडरों में तारीख़ को लेकर भ्रम इसलिए पैदा होता है क्योंकि सप्तमी तिथि और रविवार का मेल हर बार एक-सा नहीं होता। भानु सप्तमी केवल सप्तमी नहीं बल्कि रविवार को पड़ने वाली सप्तमी होती है। इसी कारण इसकी तिथि तय करते समय केवल तिथि नहीं वार को भी देखना ज़रूरी होता है।
भानु सप्तमी 2026 की सही तिथि क्या है?
2026 में भानु सप्तमी रविवार 25 जनवरी को मनाई जाएगी।
| विवरण | जानकारी |
| पर्व | भानु सप्तमी |
| दिन | रविवार |
| तिथि | माघ मास शुक्ल पक्ष सप्तमी |
| ग्रेगोरियन तिथि | 25 जनवरी 2026 |
क्यों 25 जनवरी ही मान्य है?
क्योंकि इस दिन:
- सप्तमी तिथि उपस्थित है
- और वही दिन रविवार है
यदि सप्तमी तिथि किसी अन्य वार को पड़ती है तो उसे सामान्य सप्तमी माना जाता है भानु सप्तमी नहीं।
भानु सप्तमी क्या होती है?
हिंदू पंचांग परंपरा में जब सप्तमी तिथि और रविवार एक साथ आते हैं तो उस दिन को भानु सप्तमी कहा जाता है। यह दिन भगवान सूर्य को समर्पित माना जाता है।
‘भानु’ शब्द स्वयं सूर्य का एक नाम है जिसका अर्थ है प्रकाश देने वाला। इसी कारण यह तिथि सूर्य उपासना से सीधे जुड़ी मानी जाती है।
भानु सप्तमी और रथ सप्तमी का संबंध
माघ मास में पड़ने वाली भानु सप्तमी को कई स्थानों पर माघ सप्तमी या रथ सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है।
परंपराओं के अनुसार:
- इस दिन सूर्य के सात घोड़ों वाले रथ के प्रकट होने की स्मृति जुड़ी है
- सूर्य के उत्तरायण होने के बाद यह पहली प्रमुख सप्तमी मानी जाती है
इसी कारण माघ महीने की भानु सप्तमी को वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण भानु सप्तमी माना जाता है।
भानु सप्तमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
भानु सप्तमी को केवल पूजा का दिन नहीं माना गया है।
यह दिन प्रकाश ऊर्जा और अनुशासन से जुड़ा प्रतीक माना जाता है।
शास्त्रीय दृष्टि से सूर्य:
- जीवन की निरंतरता का आधार हैं
- समय और ऋतु चक्र के नियंत्रक माने जाते हैं
- स्वास्थ्य और चेतना के प्रतीक माने जाते हैं
इसी कारण सूर्य उपासना को किसी एक वर्ग या क्षेत्र तक सीमित नहीं किया गया।
भानु सप्तमी पर क्या किया जाता है?
भानु सप्तमी की परंपराएँ क्षेत्र और कुलाचार के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं लेकिन कुछ अभ्यास सामान्य रूप से देखे जाते हैं।
सामान्य परंपराएँ:
- सूर्योदय से पहले स्नान
- खुले स्थान पर सूर्य की ओर मुख करके जल अर्पण
- जल में चावल या लाल पुष्प मिलाने की परंपरा
- शांत स्वर में सूर्य से जुड़े मंत्रों का स्मरण
यह सब कर्मकांड से अधिक अनुशासन और नियमितता का अभ्यास माना जाता है।
इस दिन सूर्य उपासना का भाव क्या है?
भानु सप्तमी पर सूर्य की पूजा को अक्सर “फल प्राप्ति” से जोड़ दिया जाता है
लेकिन परंपरागत दृष्टि में इसका मूल भाव अलग है।
यह दिन याद दिलाता है कि:
- समय का सम्मान करना
- दिनचर्या में नियमितता लाना
- स्वास्थ्य और आत्मअनुशासन पर ध्यान देना
भी उपासना का ही रूप है।
इसी कारण सूर्य उपासना को दैनिक अभ्यास से जोड़ा गया न कि केवल पर्व से।
भानु सप्तमी क्यों हर महीने नहीं मनाई जाती?
हालाँकि सप्तमी हर महीने आती है और रविवार भी नियमित होता है
लेकिन दोनों का संयोग बहुत सीमित बार ही बनता है।
इसी दुर्लभता के कारण:
- भानु सप्तमी को विशेष माना जाता है
- और माघ महीने की भानु सप्तमी को सबसे प्रमुख स्थान दिया गया है
भानु सप्तमी 2026 में 25 जनवरी रविवार को मनाई जाएगी।
यह तिथि केवल पंचांग की गणना नहीं बल्कि सूर्य उपासना से जुड़े अनुशासन और चेतना का प्रतीक मानी जाती है।यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि प्रकाश केवल बाहर नहीं जीवन की व्यवस्था और सोच में भी होना चाहिए।
First Published on: January 22, 2026 6:02 pm IST




