आज का पंचांग 19 फरवरी 2026: फुलेरा दूज पर क्या आज का दिन खास है जानें राहुकाल और मुहूर्त
आज फुलेरा दूज पर क्या बिना मुहूर्त देखे काम शुरू करना सही है? जानें 19 फरवरी 2026 के पंचांग में राहुकाल और शुभ समय।

फाल्गुन शुक्ल द्वितीया और फुलेरा दूज
आज फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। इसी दिन फुलेरा दूज का पर्व भी मनाया जाता है जो होली के आगमन का शांत संकेत माना जाता है।
कई स्थानों पर मंदिरों में राधा-कृष्ण का फूलों से श्रृंगार किया जाता है और भजन-कीर्तन होते हैं। यह दिन रंगों की हलचल से पहले आने वाली एक कोमल शुरुआत जैसा महसूस होता है।
तिथि योग और करण
शुक्ल द्वितीया तिथि सायं 03 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। इसके बाद तृतीया आरंभ होगी।
सिद्ध योग सायं 08 बजकर 42 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
कौलव करण सायं 03 बजकर 58 मिनट तक और तैतिल करण अगले दिन प्रातः 03 बजकर 21 मिनट तक रहेगा।
पंचांग में ये तत्व दिन की संरचना को समझने के लिए बताए जाते हैं ताकि लोग समय के पारंपरिक विभाजन को जान सकें।
सूर्य और चंद्रमा का समय
सूर्योदय प्रातः 06 बजकर 56 मिनट पर और सूर्यास्त सायं 06 बजकर 14 मिनट पर होगा।
चंद्रमा का उदय प्रातः 07 बजकर 54 मिनट और अस्त सायं 08 बजकर 11 मिनट पर होगा।
ये समय मौसम और दिन-रात के बदलाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं और पारंपरिक दिनचर्या का हिस्सा रहे हैं।
ग्रह स्थिति का संक्षिप्त विवरण
आज सूर्य चंद्र बुध शुक्र और राहु कुंभ राशि में स्थित हैं।
मंगल मकर राशि में बृहस्पति मिथुन में शनि मीन में और केतु सिंह में स्थित हैं।
पंचांग में ग्रहों की स्थिति का उल्लेख केवल आकाशीय गणना को बताने के लिए किया जाता है ताकि पारंपरिक ज्योतिषीय संरचना समझी जा सके।
आज के शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा।
अमृत काल दोपहर 01 बजे से 02 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।
परंपरा में इन समयों को सकारात्मक माना गया है हालांकि इन्हें सांस्कृतिक संदर्भ में ही देखा जाता है।
आज के अशुभ समय
राहुकाल दोपहर 02 बजे से 03 बजकर 25 मिनट तक रहेगा।
गुलिक काल प्रातः 09 बजकर 46 मिनट से 11 बजकर 10 मिनट तक रहेगा।
यमगण्ड प्रातः 06 बजकर 56 मिनट से 08 बजकर 21 मिनट तक रहेगा।
ये समय पारंपरिक मान्यताओं के आधार पर बताए जाते हैं ताकि लोग सावधानी रख सकें।
आज का नक्षत्र
आज चंद्रमा पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा जो सायं 08 बजकर 52 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
इस नक्षत्र के स्वामी बृहस्पति माने जाते हैं और देवता अज एकपाद बताए गए हैं।
नक्षत्रों का उल्लेख आकाशीय स्थिति को समझाने के लिए किया जाता है जिससे पारंपरिक पंचांग प्रणाली पूरी होती है।
फुलेरा दूज का महत्व
फाल्गुन शुक्ल द्वितीया को मनाया जाने वाला फुलेरा दूज राधा-कृष्ण की भक्ति से जुड़ा उत्सव है। इस दिन मंदिरों में पुष्पों से सजावट की जाती है और भजन-कीर्तन होते हैं। कई स्थानों पर इसे होली उत्सव की शुरुआत के रूप में भी देखा जाता है।
यह दिन उत्सव से अधिक एक भावनात्मक तैयारी जैसा होता है जब वातावरण में रंगों से पहले श्रद्धा और आनंद की अनुभूति दिखाई देती है।
First Published on: February 19, 2026 12:10 pm IST




