Adhik Maas 2026: जानें कब लगेगा पुरुषोत्तम मास और क्या हैं इसके नियम

Adhik Maas 2026 में साल होगा 13 महीनों का। जानिए इसका कारण, धार्मिक महत्व और इस दौरान कौन-कौन से काम करने चाहिए और क्या नहीं

Adhik Maas 2026: जानें कब लगेगा पुरुषोत्तम मास और क्या हैं इसके नियम

जब मैंने यह सुना कि 2026 में पूरे 13 महीने होंगे   तो दिमाग में एक ठहराव-सा आया  मानो समय खुद रुककर सांस लेना चाहता हो 
आमतौर पर हम साल को 12 महीनों की स्पष्ट संरचना में सोचते हैं   लेकिन जब कैलेंडर की लय खुद में एक महीना जोड़ती है   तो वह केवल पंचांग का समायोजन नहीं होता   यह एक सूक्ष्म संकेत है  शायद ब्रह्मांड हमें जीवन की तीव्र गति से हटकर कुछ और सोचने   ठहरने और भीतर झाँकने का मौन आमंत्रण दे रहा है 
Adhik Maas 2026 सिर्फ एक खगोलीय घटना नहीं   बल्कि एक ऐसा अध्यात्मिक पड़ाव है जहाँ समय खुद पुनर्संयोजन करता है  

हिंदू पंचांग के अनुसार अधिकमास 2026 में ज्येष्ठ माह दो बार पड़ेगा 
पहला ज्येष्ठ माह होगा सामान्य 30 दिनों का   लेकिन उसके बाद एक अतिरिक्त ज्येष्ठ माह यानी अधिक ज्येष्ठ जुड़ेगा   यह अधिकमास विक्रम संवत 2083 में आएगा   इस प्रकार   2026 में कुल 13 महीने होंगे  जो सामान्य 12 महीनों की वार्षिक गति से एक अतिरिक्त अध्यात्मिक विराम की तरह होगा  

संभावित तिथियां (पंचांग के अनुसार):

  • पहला ज्येष्ठ माह: 10 मई 2026 – 8 जून 2026
  • अधिकमास (अधिक ज्येष्ठ): 9 जून 2026 – 8 जुलाई 2026
  • दूसरा (सामान्य) आषाढ़ माह: 9 जुलाई 2026 से

(तिथियां पंचांग संस्करण के अनुसार भिन्न हो सकती हैं)

हिंदू पंचांग चंद्र आधारित होता है   जबकि सामान्य सौर वर्ष 365 दिनों का होता है   एक चंद्र वर्ष में लगभग 354 दिन होते हैं 
इस तरह हर साल लगभग 11 दिन का अंतर आता है   यह अंतर हर 32 या 33 महीनों में लगभग एक महीने तक बढ़ जाता है   जिसे संतुलित करने के लिए एक अधिकमास जोड़ा जाता है  

यह ठीक वैसा ही है जैसे कोई घड़ी पीछे रह जाए और हम उसे फिर से मिला दें  अधिकमास ब्रह्मांडीय घड़ी का वह रीसेट बटन है  

पुराणों के अनुसार जब यह अतिरिक्त महीना अस्तित्व में आया   तो कोई भी देवता इसे अपनाने को तैयार नहीं हुआ   इसे ‘मलमास’ कहकर त्याग दिया गया   तब इस मास ने श्रीविष्णु की शरण ली 
भगवान विष्णु ने करुणा पूर्वक इसे अपनाया और कहा:

“तू अब ‘पुरुषोत्तम मास’ कहलाएगा   और जो तुझे समर्पण भाव से जिएगा   उसे मैं स्वयं अपने समान फल दूँगा  “

इसलिए इस महीने को ‘पुरुषोत्तम मास’ कहा जाता है   और यह दान   तप   भक्ति और विष्णु उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है  

इस महीने कोई भी भौतिक या सांसारिक शुभ कार्य जैसे विवाह   मुंडन   गृह प्रवेश आदि वर्जित माने गए हैं   लेकिन यह काल आध्यात्मिक उन्नयन   आत्मचिंतन   तपस्या और संयम के लिए सर्वोत्तम होता है  

अधिकमास में करें ये कार्य:

  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ
  • गीता का नियमित अध्ययन
  • ब्रह्मचर्य व संयम का पालन
  • हरि नाम संकीर्तन और कथा श्रवण
  • तामसिक भोजन से परहेज
  • सूर्योदय के समय स्नान और संध्या वंदन
  • दान (विशेषकर अन्न   वस्त्र   जल   गौ   स्वर्ण आदि)
  • विवाह   सगाई   गृह प्रवेश या नया व्यवसाय आरंभ न करें
  • शारीरिक विलासिता   अत्यधिक आडंबर   मनोरंजन से बचें
  • किसी का अपमान   क्रोध   लोभ   असत्य भाषण आदि वर्जित हैं
  • मूर्ति स्थापना और शिलान्यास जैसे कार्य टालें

अधिकमास वह समय है जब देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है   लेकिन केवल तभी जब साधक इसके स्वरूप को समझे 
यह मास हमें जीवन की मूल धारा में लौटने का निमंत्रण देता है  जहाँ शांति   संयम   भक्ति और मौन हो 
यह हृदय की गति को समय की गति के साथ मिलाने का प्रयास है  

जब समय भी पुनर्मंथन चाहता है

अधिकमास 2026 केवल पंचांग का एक समायोजन नहीं है   यह एक अवसर है  थोड़ा रुकने   थोड़ा झाँकने   और थोड़ा ऊपर उठने का 
जब साल 13 महीनों का हो जाए   तो समझिए कि समय खुद हमें संकेत दे रहा है  अब बाहरी नहीं   भीतरी यात्रा का समय है  

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक और सांस्कृतिक स्रोतों   पंचांगों और परंपरागत मान्यताओं पर आधारित है   Hinduifestival.com इसकी किसी धार्मिक पूर्णता या त्रुटिहीनता की गारंटी नहीं देता   पाठकों से आग्रह है कि स्थानीय आचार्यों या पंचांग विशेषज्ञों से परामर्श अवश्य लें  



TOPICS Religion

First Published on: December 12, 2025 8:00 pm IST

About the Author: Ritika Rawal

I am Ritika Rawal, a ground-level religious writer exploring Gods, Aarti traditions, Horoscope, Panchang and temple culture. I work closely with local pandits and experienced astrologers, bringing their real insights to readers. My focus is pure, authentic spiritual reporting that connects rituals with everyday faith.