Akshat Gupta Podcast 2025: महाभारत के रहस्य, रामायण, शिव, अघोरी, कैलाश पर्वत और कल्कि अवतार पर चर्चा

Akshat Gupta ने Pinkvilla पॉडकास्ट में महाभारत के पात्रों, चिरंजीवों और कल्कि अवतार को प्रतीकात्मक दृष्टि से समझाया

Akshat Gupta Podcast 2025: महाभारत के रहस्य, रामायण, शिव, अघोरी, कैलाश पर्वत और कल्कि अवतार पर चर्चा

Pinkvilla के लोकप्रिय YouTube पॉडकास्ट में हाल ही में लेखक और विचारक अक्षत गुप्ता के साथ एक लंबी और गहन बातचीत प्रकाशित की गई है    यह बातचीत Pinkvilla के आधिकारिक YouTube चैनल पर साझा की गई   जिसके 4.71 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर हैं   

 इस पॉडकास्ट की खास बात यह रही कि इसमें महाभारत   रामायण   शिव-तत्व   चिरंजीव   कर्ण   अश्वत्थामा और कल्कि अवतार जैसे विषयों पर सामान्य व्याख्याओं से हटकर बात की गई   

होस्ट विनाश ने बातचीत को केवल कथा या आस्था तक सीमित नहीं रखा   बल्कि ऐसे प्रश्न सामने रखे जो आज के समय में बहुत से लोग मन में रखते हैं   लेकिन सार्वजनिक रूप से पूछने से हिचकते हैं   

अक्षत गुप्ता के अनुसार भारतीय ग्रंथों को यदि केवल शाब्दिक या ऐतिहासिक दृष्टि से पढ़ा जाए   तो उनका मूल उद्देश्य अधूरा रह जाता है    उनके मुताबिक महाकाव्य और पुराण प्रतीकों के माध्यम से समय   चेतना और मानव स्वभाव को समझाने का माध्यम हैं   न कि केवल घटनाओं का संग्रह   

पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने यह स्पष्ट किया कि प्राचीन भारत में ज्ञान को कहानी के रूप में प्रस्तुत करने के पीछे एक व्यावहारिक कारण था   


उनके अनुसार मनुष्य तथ्यों से अधिक कथाओं को याद रखता है    यही कारण है कि रामायण और महाभारत जैसी रचनाएं पात्रों   संवादों और प्रतीकों के साथ कही गईं   

उन्होंने यह भी बताया कि जैसे आज के समय में फिल्में   थिएटर और वेब सीरीज़ समाज की सोच को प्रभावित करती हैं   वैसे ही प्राचीन काल में रामलीला   कथाएं और लोक-नाट्य लोगों के जीवन को दिशा देने का माध्यम थीं  


उनके अनुसार कथा का उद्देश्य यह नहीं था कि हर बात को अक्षरशः लिया जाए   बल्कि यह कि संदेश पीढ़ियों तक जीवित रहे   

कर्ण के कवच और कुंडलों से जुड़ी कथा पर चर्चा करते हुए अक्षत गुप्ता ने सवाल को एक अलग दिशा में मोड़ा  
उनके अनुसार असली प्रश्न यह नहीं है कि वे अस्त्र कहां गए   बल्कि यह समझना जरूरी है कि कर्ण को अजेय क्यों माना गया   

उन्होंने कहा कि कर्ण की शक्ति केवल उसके शरीर से नहीं आती थी    उसका स्वभाव   उसकी दानशीलता और उसका कर्म    ये तीनों उसकी शक्ति के मूल में थे   


उनके अनुसार दान देना कर्ण की मजबूरी नहीं थी   बल्कि उसकी प्रकृति थी    यही प्रकृति आगे चलकर उसके जीवन का सबसे बड़ा द्वंद्व भी बनी   

इंद्र द्वारा छल से कवच-कुंडल मांगे जाने की कथा को उन्होंने धर्म और समय की आवश्यकता के संदर्भ में देखा  
उनके अनुसार हर युग में धर्म की रक्षा सरल तरीकों से नहीं होती    कई बार कठिन और असहज निर्णय भी कथा का हिस्सा बनते हैं   

चिरंजीवों की अवधारणा पर बात करते हुए अक्षत गुप्ता ने इसे केवल वरदान के रूप में देखने से इंकार किया  
उनके अनुसार चिरंजीव होना कई बार एक प्रकार का दंड भी बन जाता है   

उन्होंने कहा कि जिन पात्रों ने अपने समय में धर्म और अधर्म के बीच सबसे कठिन निर्णय लिए   उन्हें समय का साक्षी बनने के लिए जीवित रहना पड़ा  
उनके मुताबिक यह भूमिका केवल देखने की नहीं   बल्कि स्मृति को ढोने की है   

पॉडकास्ट के एक महत्वपूर्ण हिस्से में उन्होंने अश्वत्थामा के चरित्र पर विस्तार से बात की  
उनके अनुसार अश्वत्थामा को केवल खलनायक कहना महाभारत को सतही रूप में पढ़ना है   

उन्होंने बताया कि अश्वत्थामा एक अच्छा पुत्र   समर्पित शिष्य और निष्ठावान मित्र था  
लेकिन जब उसके पिता द्रोणाचार्य के साथ अन्याय हुआ   तब वह एक ऐसे नैतिक संकट में फंस गया जहां गुरु   मित्र और धर्म    तीनों एक-दूसरे से टकरा रहे थे   

उनके अनुसार महाभारत के अधिकांश पात्र पूर्ण रूप से अच्छे या बुरे नहीं हैं  
यही ग्रंथ की सबसे बड़ी ताकत है   क्योंकि यह मनुष्य की आंतरिक कमजोरियों और भावनात्मक निर्णयों को उजागर करता है   

बातचीत के दौरान अक्षत गुप्ता ने सनातन और धर्म के अंतर को भी स्पष्ट किया  
उनके अनुसार सनातन किसी एक पूजा-पद्धति या धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं है   

उन्होंने कहा कि सनातन जीवन को देखने और जीने का तरीका है  
यदि कोई व्यक्ति प्रकृति   संतुलन और मानवीय मूल्यों के साथ चलता है   तो वह किसी भी धर्म को मानते हुए भी सनातन की भावना को जी सकता है   

उनके मुताबिक यही कारण है कि भारतीय परंपरा में प्रश्न पूछने और तर्क करने की स्वतंत्रता रही है   

कल्कि अवतार को लेकर उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह युद्ध किसी एक व्यक्ति से नहीं होगा  
उनके अनुसार कल्कि का संघर्ष उस मानसिकता से होगा जो अधर्म को सामान्य बना देती है   

उन्होंने बताया कि पुराणों में संकेत मिलता है कि कलियुग के अंत में धर्म की स्थापना के लिए चिरंजीवों की आवश्यकता होगी  
इसलिए कल्कि अवतार अकेले नहीं होंगे   बल्कि विभिन्न शक्तियों और चिरंजीवों का सहयोग उनके साथ होगा   

उनके अनुसार यह संघर्ष बाहरी से अधिक आंतरिक होगा    सोच   मूल्य और चेतना का   

अक्षत गुप्ता के अनुसार महाकाव्य आज भी प्रासंगिक हैं क्योंकि वे किसी एक काल की कहानी नहीं कहते  
वे हर युग में मनुष्य के सामने आने वाले नैतिक द्वंद्व   शक्ति   अहंकार   करुणा और निर्णय की कहानी कहते हैं   

इस पॉडकास्ट में कही गई बातें किसी निष्कर्ष को थोपती नहीं हैं   बल्कि प्रश्न छोड़ती हैं  
और शायद यही कारण है कि ऐसी बातचीत आज के समय में लोगों को फिर से महाकाव्यों की ओर लौटने के लिए प्रेरित करती है   

Disclaimer : यह लेख Pinkvilla के YouTube चैनल पर प्रकाशित पॉडकास्ट में लेखक और विचारक अक्षत गुप्ता द्वारा व्यक्त विचारों और धार्मिक ग्रंथों से जुड़ी लोक-मान्यताओं के आधार पर तैयार किया गया है  
hinduifestival.com किसी भी धार्मिक दावे या ऐतिहासिक निष्कर्ष की पुष्टि नहीं करता    यह सामग्री केवल सूचना और वैचारिक समझ के उद्देश्य से प्रस्तुत है   

Podcast Source : https://www.youtube.com/watch?v=vsax8o_X660



TOPICS Religion

First Published on: December 16, 2025 7:44 pm IST

About the Author: Ritika Rawal

I am Ritika Rawal, a ground-level religious writer exploring Gods, Aarti traditions, Horoscope, Panchang and temple culture. I work closely with local pandits and experienced astrologers, bringing their real insights to readers. My focus is pure, authentic spiritual reporting that connects rituals with everyday faith.