Panchak 2026: कब‑कब लगेगा पंचक और इसमें कौन से 5 काम नहीं किए जाते? जानें पूरी तिथि लिस्ट
साल 2026 में पंचक कब लगेगा? यहाँ जानें पूरे वर्ष की महीनेवार पंचक तिथियाँ, पंचक का असर और वे 5 काम जो इस अवधि में नहीं किए जाते

मैं जब 12 साल की थी तो एक बार हमारी छत की ढलाई पंचक काल में शुरू हुई थी दूसरे ही दिन तेज़ हवा में बांस की शटरिंग गिर गई और मिस्त्री को चोट लग गई तब मेरी दादी ने कहा देख पंचक में छत नहीं डलवाते ये बात किताबों में नहीं अनुभव से सीखी जाती है
यहीं से मेरी जिज्ञासा शुरू हुई कि आख़िर पंचक है क्या? और क्यों इससे इतना डरते हैं?
पंचक का मूल अर्थ क्या है?
पंचक का शाब्दिक अर्थ है ‘पांच’ का समूह ज्योतिषीय रूप से पंचक वह काल होता है जब चंद्रमा धनिष्ठा शतभिषा पूर्वाभाद्रपद उत्तराभाद्रपद और रेवती इन पांच नक्षत्रों में गोचर करता है
ये पांच नक्षत्र मकर से मीन राशि के अंतिम भाग तक फैले होते हैं और जब चंद्रमा इनसे गुजरता है तो पंचक लग जाता है
इस अवधि को अशुभ माना जाता है क्योंकि इसे आकस्मिक घटनाओं विघ्न रोग मृत्यु और विफलता से जोड़ा गया है इसका असर केवल धार्मिक नहीं बल्कि व्यवहारिक कार्यों पर भी देखा गया है
खासकर गृह निर्माण यात्रा खरीदारी अंतिम संस्कार लकड़ी/घास से जुड़े काम आदि
पंचक का वैज्ञानिक और ज्योतिषीय आधार
- पंचक के दौरान चंद्रमा ‘क्रूर ग्रहों’ की संगति में आता है
- इन पांच नक्षत्रों में गोचर के समय प्राकृतिक ऊर्जा में अस्थिरता रहती है
- कई पुराणों और ज्योतिष ग्रंथों में इस काल को कार्य-विघ्न कारक माना गया है
पंचक कितने दिन चलता है?
हालांकि इसे पांच दिन का काल कहा जाता है पर असल में यह लगभग 4 से 6 दिन तक चलता है यह इस पर निर्भर करता है कि चंद्रमा कितनी देर तक इन नक्षत्रों में रहता है
पंचक की शुरुआत और समापन सटीक समय के अनुसार मानी जाती है सिर्फ दिन देखकर पंचक को समझना ग़लत हो सकता है
Panchak 2026: पूरे वर्ष की तिथियों की सूची
| महीना | शुरू होने का समय | समाप्त होने का समय |
| जनवरी | 21 जनवरी बुधवार 01:35 पूर्वाह्न | 25 जनवरी रविवार 01:35 दोपहर |
| फरवरी | 17 फरवरी मंगलवार 09:05 सुबह | 21 फरवरी शनिवार 07:07 शाम |
| मार्च | 16 मार्च सोमवार 06:14 शाम | 21 मार्च शनिवार 02:27 पूर्वाह्न |
| अप्रैल | 13 अप्रैल सोमवार 03:44 सुबह | 17 अप्रैल शुक्रवार 12:02 दोपहर |
| मई | 10 मई रविवार 12:12 दोपहर | 14 मई गुरुवार 10:34 रात |
| जून | 06 जून शनिवार 07:03 शाम | 11 जून गुरुवार 08:16 सुबह |
| जुलाई | 04 जुलाई शनिवार 12:48 दोपहर | 08 जुलाई बुधवार 04:00 शाम |
| जुलाई (2) | 31 जुलाई शुक्रवार 06:38 सुबह | 04 अगस्त मंगलवार 09:54 रात |
| अगस्त | 27 अगस्त गुरुवार 01:35 दोपहर | 01 सितंबर मंगलवार 03:23 पूर्वाह्न |
| सितंबर | 23 सितंबर बुधवार 09:57 रात | 28 सितंबर सोमवार 10:16 सुबह |
| अक्टूबर | 21 अक्टूबर बुधवार 07:00 सुबह | 25 अक्टूबर रविवार 07:22 शाम |
| नवंबर | 17 नवंबर मंगलवार 03:30 दोपहर | 22 नवंबर रविवार 05:54 सुबह |
| दिसंबर | 14 दिसंबर सोमवार 10:35 रात | 19 दिसंबर शनिवार 03:58 दोपहर |
पंचक में कौन से 5 कार्य नहीं करने चाहिए?
1. लकड़ी घास या बांस घर में न लाएं
इस दौरान घर में लकड़ी घास बांस चारपाई चूल्हा जैसी वस्तुएं एकत्र करना वर्जित है मान्यता है कि ये वस्तुएं अग्नि तत्व से जुड़ी होती हैं और पंचक में इनका संकलन घर में रोग और कष्ट बढ़ा सकता है
2. चारपाई बनाना या खोलना वर्जित
चारपाई को खोलना बुनना या मरम्मत करना अशुभ माना जाता है दादी कहती थीं पंचक में चारपाई की डोरी भी नहीं खींचनी चाहिए
3. घर की छत डालना या निर्माण कार्य टालना
पंचक में भवन निर्माण का शुभारंभ या छत का ढलवाना वर्जित है मान्यता है कि इससे घर में धनहानि या दुर्घटनाएं हो सकती हैं
4. दक्षिण दिशा की यात्रा न करें
पंचक काल में दक्षिण दिशा की यात्रा को यमगामी कहा जाता है धार्मिक मान्यता है कि यह मृत्यु और विघ्न की दिशा होती है
5. मृत्यु होने पर सामान्य संस्कार न करें
पंचक में मृत्यु होने पर केवल सामान्य अंतिम संस्कार करना पर्याप्त नहीं होता शांति के लिए पांच पुतले बनाकर उनका प्रतीकात्मक संस्कार किया जाता है ताकि पंचक दोष दूर हो सके और पांच और मृत्युओं की संभावना टाली जा सके
पंचक शांति के उपाय
यदि पंचक के दौरान कोई कार्य करना ही पड़े (जैसे अंतिम संस्कार) तो निम्न उपाय किए जा सकते हैं:
- नारायणबलि पूजा
- पंचक दोष निवारण यज्ञ
- गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय जाप
- पंडित से पंचोपचार विधि द्वारा विशेष हवन
पंचक को समझना केवल ‘डर’ की बात नहीं है यह अनुभवजन्य ज्योतिष का एक हिस्सा है जहां प्रकृति हमें बताती है कि कब रुकना है कब ठहरना है यह चेतावनी नहीं बल्कि दिशा संकेत है
और आज जब सब कुछ ऑनलाइन कैलेंडर से तय हो रहा है तो पंचक की समझ हमें संयम विराम और प्रतीक्षा की कला सिखाती है
Disclaimer : इस लेख की जानकारी धार्मिक ग्रंथों, ज्योतिषीय परंपराओं और लोक मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी सत्यता या किसी कार्य के परिणाम की गारंटी नहीं देते
First Published on: December 5, 2025 3:49 pm IST




