Hanuman Ji Chola Chadhane Ke Fayde: धार्मिक मान्यताओं में क्यों माना जाता है इसे संकट निवारण का उपाय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी को चोला चढ़ाना संकट, शनि दोष और मानसिक कष्टों से राहत का प्रभावी उपाय माना जाता है

Hanuman Ji Chola Chadhane Ke Fayde: धार्मिक मान्यताओं में क्यों माना जाता है इसे संकट निवारण का उपाय

भारतीय धार्मिक परंपराओं में कुछ उपाय केवल कर्मकांड नहीं होते  वे पीढ़ियों से चले आ रहे श्रद्धा के प्रतीक होते हैं   हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाना ऐसी ही एक मान्यता है  जिसे संकट और दोष निवारण का प्रभावशाली माध्यम माना गया है  

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार  चोला चढ़ाने से न केवल मानसिक और शारीरिक कष्टों से राहत मिलती है  बल्कि शनि  राहु और केतु जैसे ग्रहों की प्रतिकूलता भी शांत होती है   कई श्रद्धालु इसे जीवन की स्थिरता और आंतरिक बल प्राप्त करने का सरल  लेकिन प्रभावशाली उपाय मानते हैं  

पुजारियों और परंपरागत आचार्यों की राय में चोला चढ़ाना केवल बाहरी पूजा नहीं  बल्कि भीतरी समर्पण की प्रक्रिया है   सिंदूर  जो हनुमान जी को अत्यंत प्रिय माना गया है  एक ऊर्जावान माध्यम है जो शरीर  मन और ग्रहीय ऊर्जा के बीच संतुलन साधने का कार्य करता है  

किन कष्टों से राहत मिलती है?

  • शनि के प्रभावों में कमी: विशेषकर शनिवार को चोला अर्पित करने से साढ़ेसाती और ढैय्या की स्थितियों में शांति मिलती है
  • राहु-केतु की बाधाओं में राहत: पितृदोष  मानसिक भ्रम  दुर्घटनाओं से सुरक्षा
  • मनोकामना पूर्ति और आत्मबल में वृद्धि
  • भय  रोग और संकोच के भावों का क्षय

परंपरा के अनुसार  निम्नलिखित वस्तुएं चोला चढ़ाने से पहले एकत्र करना आवश्यक होता है:

  • वटवृक्ष से प्राप्त अथवा मंदिर का विशेष सिंदूर
  • मंगलवार को देसी गाय का घी  शनिवार को चमेली का तेल
  • गंगाजल मिला शुद्ध जल
  • रुई के दीपक  धूप  कपूर
  • श्री हनुमान चालीसा
  • चांदी या स्वर्ण वर्क (या फिर उसका विकल्प)
  • लाल या पीले रंग का वस्त्र पहनना भी अनुशंसा की जाती है

पहला चरण: शुद्धिकरण

प्रतिमा से पुराने चोले को सावधानीपूर्वक हटाया जाता है   फिर गंगाजल से स्नान और स्वच्छ वस्त्र से सुखाया जाता है  

दूसरा चरण: लेपन

सिंदूर में तेल या घी मिलाकर गाढ़ा लेप तैयार किया जाता है   यह लेप सिर से आरंभ कर पूरे शरीर पर श्रद्धा से लगाया जाता है  

तीसरा चरण: सज्जा और पाठ

इसके बाद चांदी का वर्क लगाया जाता है और हनुमान चालीसा का पाठ शुरू होता है   यदि समय और परिस्थिति अनुकूल हो  तो 11 बार पाठ करने की परंपरा भी प्रचलित है  

शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार  सभी दिन चोला चढ़ाने योग्य नहीं माने जाते   निम्न तिथियाँ विशेष फलदायी मानी गई हैं:

  • मंगलवार
  • शनिवार
  • हनुमान जयंती
  • राम नवमी
  • होली  दीपावली जैसी विशिष्ट तिथियाँ

अन्य दिनों में चोला चढ़ाना वर्जित नहीं है  लेकिन प्रचलित परंपरा इससे परहेज़ की सलाह देती है  

  • सिंदूर सवा मात्रा में अर्पित करें (सवा पाव  सवा किलो आदि)
  • घी और तेल का प्रयोग तिथि अनुसार हो
  • पूजन स्थल शुद्ध और शांत हो
  • चोले के दौरान प्रतिमा पर सांस न लगने दें
  • पुराने चोले का सम्मानपूर्वक विसर्जन करें (प्रवाहित जल में)

चोला अर्पण करते समय यह मंत्र उच्चारित किया जाता है:

सिन्दूरं रक्तवर्णं च सिन्दूरतिलकप्रिये भक्त्या दत्तं मया देव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम

इसके पश्चात धूप-दीप के साथ हनुमान चालीसा और आरती होती है  

किसी भी पूजा के अंत में यह माना जाता है कि यदि कोई त्रुटि हो गई हो  श्रद्धा में कमी  विधि में भूल  तो उसकी क्षमा मांगी जाए   इसके लिए निम्न पंक्तियाँ बोलना सामान्य है:

अपाराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया दासोऽहमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर

चोला चढ़ाना केवल एक कर्म नहीं है  यह उस अंतःकरण की अभिव्यक्ति है जो कहता है: “मैं अब डर से नहीं  विश्वास से जीना चाहता हूँ  ” यह वह क्षण होता है जब भक्त हनुमान जी के सामने स्वयं को समर्पित करता है  और प्रतिकूलताओं के आगे झुकने की जगह साहस से खड़ा होना सीखता है  

अस्वीकरण: यह लेख धार्मिक मान्यताओं परंपराओं और लोकविश्वासों पर आधारित है  इसका उद्देश्य किसी अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं  बल्कि सांस्कृतिक जानकारी साझा करना है।



TOPICS hanuman Religion

First Published on: December 18, 2025 7:13 pm IST

About the Author: Suhani Chauhan

I am Suhani Chauhan, a Religion and Hindu Calendar researcher at Hinduifestival.com, specializing in Hindu festivals, Panchang, and tithi systems. I study classical scriptures, traditional Panchang methods, and astronomical principles to understand sacred timekeeping. My work explains how lunar and solar cycles shape religious dates and rituals across India. I aim to present Hindu calendar knowledge in a clear, accurate, and trustworthy way for modern reader