Lalita Jayanti 2026: ललिता जयंती कब है तिथि पूजा विधि और महत्व

ललिता जयंती 2026 माघ पूर्णिमा को मनाई जाएगी। जानिए पंचांग अनुसार तिथि, पूजा विधि और देवी ललिता त्रिपुरा सुंदरी का महत्व

Lalita Jayanti 2026: ललिता जयंती कब है तिथि  पूजा विधि और महत्व

ललिता जयंती हिंदू परंपरा में देवी ललिता त्रिपुरा सुंदरी के प्राकट्य दिवस के रूप में मानी जाती है।
यह पर्व केवल एक देवी जयंती नहीं है  बल्कि शक्ति  सौंदर्य और चेतना के संतुलित स्वरूप की उपासना से जुड़ा हुआ माना जाता है।

श्रीविद्या परंपरा में देवी ललिता को पराशक्ति का साकार रूप कहा गया है  जिनकी आराधना साधक के मन  वाणी और कर्म को संतुलित करने वाली मानी जाती है।

हिंदू पंचांग में किसी भी पर्व की तिथि अंग्रेज़ी कैलेंडर के अनुसार नहीं  बल्कि चंद्र आधारित तिथि प्रणाली से तय की जाती है।

 ललिता जयंती प्रत्येक वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है।

वर्ष 2026 में माघ शुक्ल पूर्णिमा तिथि का आरंभ
1 फरवरी 2026 को प्रातः 5 बजकर 52 मिनट पर हो रहा है
जबकि इस तिथि का समापन
2 फरवरी 2026 को प्रातः 3 बजकर 38 मिनट पर होगा।

हिंदू धर्म में पर्व निर्धारण के लिए उदय तिथि सिद्धांत अपनाया जाता है  जिसके अनुसार जिस तिथि का प्रभाव सूर्योदय के समय रहता है  वही दिन पर्व के लिए मान्य होता है।
चूंकि 1 फरवरी 2026 को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान है  इसलिए ललिता जयंती 2026 का पर्व 1 फरवरी  रविवार को मनाया जाएगा।

यह गणना हिंदू कैलेंडर की उस प्रणाली को दर्शाती है जिसमें तिथि का आरंभ और अंत घड़ी की तारीख से नहीं  बल्कि चंद्रमा और सूर्य की स्थिति से तय होता है।

देवी ललिता को दस महाविद्याओं में तीसरी महाविद्या माना गया है।
शास्त्रों में उनका स्वरूप सौंदर्य  करुणा और चेतना के समन्वय के रूप में वर्णित है।

श्रीविद्या साधना में देवी ललिता को श्रीचक्र की अधिष्ठात्री ब्रह्मांडीय शक्ति की केंद्रबिंदु और साधक की आंतरिक चेतना की प्रतीक के रूप में देखा जाता है।


इसी कारण उनकी उपासना को केवल बाहरी पूजा नहीं  बल्कि अंतर साधना का मार्ग माना गया है।

ललिता जयंती को शक्ति उपासना का अत्यंत शुभ दिवस माना गया है।
मान्यता है कि इस दिन की गई साधना और पूजा साधक के भीतर

मानसिक स्थिरता भावनात्मक संतुलन और आत्मविश्वास को प्रबल करती है।

पंडितीय दृष्टि से यह दिन विशेष रूप से सौम्य शक्ति की आराधना से जुड़ा है  जो उग्रता नहीं बल्कि संतुलन और करुणा का प्रतीक मानी जाती है।

ललिता जयंती की पूजा में आडंबर से अधिक शुद्धता  भाव और एकाग्रता को महत्व दिया जाता है।
यह पूजा साधारण विधि से भी की जा सकती है  बशर्ते साधक का मन शांत और एकाग्र हो।

पूजा से पहले प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं।
पूजा स्थान को साफ कर लाल या गुलाबी वस्त्र बिछाया जाता है  क्योंकि ये रंग देवी ललिता के सौम्य स्वरूप से जुड़े माने जाते हैं।

इसके बाद देवी ललिता के चित्र या प्रतीक को स्थापित कर दीप प्रज्वलन किया जाता है।
पुष्प  धूप और सात्त्विक नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं।

ललिता जयंती के दिन ललिता सहस्रनाम  त्रिपुरा सुंदरी स्तोत्र या श्रीविद्या परंपरा से जुड़े मंत्रों का पाठ विशेष रूप से शुभ माना गया है।
पूजा के समय वातावरण शांत रखना और अनावश्यक वाणी से बचना उचित माना जाता है।

कुछ साधक इस दिन उपवास रखते हैं  जबकि कुछ केवल सात्त्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
शास्त्रों में यह स्पष्ट किया गया है कि व्रत का उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं  बल्कि मन को संयमित करना है।

ललिता जयंती पर मौन ध्यान और आत्मचिंतन  को विशेष महत्व दिया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई साधना साधक को आंतरिक सौंदर्य और मानसिक स्पष्टता का अनुभव कराती है।

ललिता जयंती को केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं माना गया है।
परंपरा में इसे पारिवारिक सौहार्द  स्त्री सम्मान और भावनात्मक संतुलन से भी जोड़ा गया है।

मान्यता है कि देवी ललिता की उपासना से घर में शांति संबंधों में मधुरता  और विचारों में स्थिरता  बनी रहती है।

ललिता जयंती 2026 एक ऐसा पर्व है जो शक्ति को उग्र रूप में नहीं  बल्कि सौम्यता और संतुलन के रूप में देखने की प्रेरणा देता है।
 

यह तिथि साधक को यह स्मरण कराती है कि सच्ची शक्ति बाहरी प्रदर्शन में नहीं  बल्कि चेतना और करुणा में निहित होती है।

जो व्यक्ति इस पर्व को केवल कर्मकांड नहीं  बल्कि आत्मिक अनुशासन के रूप में देखता है  उसके लिए ललिता जयंती आंतरिक जागरण का अवसर बन सकती है।

डिस्क्लेमर : यह लेख पंचांग  शास्त्रीय परंपराओं और सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित है।
पूजा विधि और तिथि निर्धारण क्षेत्रीय पंचांग और परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।
Hinduifestival.com पाठकों को सलाह देता है कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पूर्व स्थानीय पंचांग या योग्य विद्वान से पुष्टि अवश्य करें।



TOPICS Hindu Calendar

First Published on: January 26, 2026 7:34 am IST

About the Author: Suhani Chauhan

I am Suhani Chauhan, a Religion and Hindu Calendar researcher at Hinduifestival.com, specializing in Hindu festivals, Panchang, and tithi systems. I study classical scriptures, traditional Panchang methods, and astronomical principles to understand sacred timekeeping. My work explains how lunar and solar cycles shape religious dates and rituals across India. I aim to present Hindu calendar knowledge in a clear, accurate, and trustworthy way for modern reader