Hanumath Jayanthi 2025: तमिल पंचांग के अनुसार हनुमान जयंती 19 या 20 दिसंबर को? जानिए सही तिथि और धार्मिक संदर्भ
Hanumath Jayanthi 2025 की तिथि 19 या 20 दिसंबर? जानिए पंचांग, अमावस्या तिथि और मूलम नक्षत्र के अनुसार तमिलनाडु में कब मनाई जाएगी हनुमान जयंती

हनुमान जयंती केवल एक तिथि नहीं है यह उस दिन का स्मरण है जब बजरंगबली का प्राकट्य इस पृथ्वी पर हुआ था बल भक्ति और ब्रह्मचर्य के साक्षात रूप में
2025 में Hanumath Jayanthi तमिल पंचांग अनुसार 19 दिसंबर शुक्रवार को मनाई जाएगी लेकिन चूंकि तिथि 19 और 20 दिसंबर दोनों को स्पर्श कर रही है इसलिए श्रद्धालु भ्रमित होते हैं कि सही दिन कौन‑सा है
पंचांग निर्णय: 2025 में Hanumath Jayanthi की तिथि कैसे तय हुई?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार दक्षिण भारत विशेषकर तमिलनाडु में हनुमान जयंती मार्गशीर्ष अमावस्या को मनाई जाती है और यदि मूलम नक्षत्र भी उस दिन हो तो उसे पूर्ण हनुमान जन्मयोग माना जाता है
शास्त्रों के अनुसार “अमावस्या युक्त मूलनक्षत्रे हनूमत्प्रादुर्भावः”
2025 के पंचांग गणना अनुसार:
| विवरण | तिथि और समय |
| अमावस्या तिथि प्रारंभ | 19 दिसंबर सुबह 4:59 बजे |
| अमावस्या तिथि समाप्त | 20 दिसंबर सुबह 7:12 बजे |
| मूलम नक्षत्र आरंभ | 18 दिसंबर दोपहर में |
| मूलम नक्षत्र समाप्त | 19 दिसंबर रात्रि तक |
19 दिसंबर को अमावस्या और मूलम दोनों आंशिक रूप से उपस्थित हैं अतः तमिल पंचांग परंपरा में 19 दिसंबर को व्रत एवं पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है
क्या कहते हैं अनुभवी पंडित और आचार्य?
पंडित वेंकट सुब्रह्मण्यम (कांची मठ) के अनुसार:
“जब मूलम नक्षत्र और अमावस्या तिथि अलग-अलग दिन पड़ें तब अमावस्या को प्रधानता दी जाती है परंतु यदि दोनों एक ही दिन को स्पर्श करें even partially तो वही दिन Hanumath Jayanthi होता है ”
यह बात आंध्र पंचांग द्रिक पंचांग और लघु सिद्धांत कौमुदी जैसे ग्रंथों में भी स्पष्ट है
मानवीय अनुभव: कैसे तय करें कि कब व्रत रखें?
यदि आप परिवार में बुजुर्गों द्वारा परंपरा में पालन करते आ रहे हैं तो उस मान्यता का पालन करें कुछ घरों में जयंती तिथि के साथ हनुमान दीक्षा उपवास या विशेष पाठ चलते हैं उनके लिए तिथि की बारीकी उतनी ज़रूरी नहीं जितनी श्रद्धा
हमारे एक रीडर “लक्ष्मीनारायणन अय्यर” बताते हैं:
“मेरे पितामह हर साल मार्गशीर्ष अमावस्या को व्रत रखते थे भले मूलम नक्षत्र हो या न हो लेकिन उन्होंने हमें बताया कि यदि दोनों एक साथ मिल जाएं तो वह विशेष फलदायी माना जाता है 2025 में यह संयोग बन रहा है इसलिए मैं इस दिन संपूर्ण व्रत करूंगा ”
उत्तर भारत बनाम दक्षिण भारत: अलग तिथियां एक ही श्रद्धा
| क्षेत्र | हनुमान जयंती तिथि |
| उत्तर भारत | चैत्र पूर्णिमा (मार्च–अप्रैल) |
| तमिलनाडु | मार्गशीर्ष अमावस्या (दिसंबर) |
| तेलंगाना/आंध्र | चैत्र पूर्णिमा से 41 दिन दीक्षा |
| महाराष्ट्र/कर्नाटक | चैत्र शुक्ल पक्ष में 15 दिवसीय पर्व |
हर क्षेत्र का अपना कालगणना नियम है लेकिन हनुमान जी का आह्वान स्तोत्र उपवास और सेवाभाव सभी जगह समान रहता है
Hanumath Jayanthi 2025: पूजन विधि और क्या करें?
यदि आप 19 दिसंबर को व्रत रखते हैं तो यह करें:
- प्रातःकाल स्नान के बाद हनुमान जी को तिल का तेल व सिंदूर अर्पित करें
- “ॐ हनुमते नमः” या “ॐ रामदूताय नमः” का जप करें
- सुंदरकांड बजरंग बाण हनुमानाष्टक का पाठ करें
- व्रत रखें या सात्विक भोजन लें
- मूलम नक्षत्र में वानर सेवा (बंदरों को केला गुड़ आदि अर्पित करें)
ज्योतिषीय लाभ: हनुमान जयंती पर क्या फल मिलते हैं?
- राहु-केतु जैसे ग्रहदोषों में राहत
- कालसर्प दोष पितृदोष और भय से मुक्ति
- ग्रह-बाधा निवारण के लिए विशेष प्रभावी
- मानसिक बल आत्मविश्वास और कष्ट सहने की शक्ति
- दीक्षा काल में तपस्वी शक्ति प्राप्त होती है
श्रद्धा के साथ ज्योतिषीय विवेक भी ज़रूरी
Hanumath Jayanthi 2025 को लेकर तिथि का भ्रम केवल पंचांग की विविधता है लेकिन उसका आध्यात्मिक उद्देश्य एक ही है श्री हनुमान के प्रति समर्पण
“तिथि चाहे जो भी हो यदि हृदय में राम हैं और मन में सेवा भाव तो हर दिन हनुमान जयंती है ”
अस्वीकरण: यह लेख पंचांग, ज्योतिषीय गणना और क्षेत्रीय परंपराओं पर आधारित है। Hinduifestival किसी धार्मिक तिथि की अंतिम पुष्टि का दावा नहीं करता।
First Published on: December 9, 2025 3:00 pm IST




