Ganesh ji ki aarti lyrics Meaning in Hindi PDF Download
गणेश जी की यह आरती न केवल भक्तिभाव से जुड़ी है, बल्कि जीवन के हर विघ्न को हरने की शक्ति भी रखती है। जानिए आरती के शब्द, उनका अर्थ, और किस मुहूर्त में यह आरती करना होता है अधिक प्रभावशाली।

गणेश जी को “विघ्नहर्ता” और “सिद्धिदाता” कहा गया है। किसी भी कार्य की सफलता हेतु सबसे पहले गणेश जी का पूजन किया जाता है।
आरती का समय यदि पंचांग और मुहूर्त देखकर किया जाए, तो उसका प्रभाव कई गुना अधिक होता है।
शुभ समय आरती हेतु:
- प्रतिदिन: सुबह सूर्योदय के समय और संध्या को सूर्यास्त के बाद
- विशेष अवसरों पर: चतुर्थी, बुधवार, गणेश चतुर्थी, नये काम की शुरुआत, परीक्षा/साक्षात्कार से पहले
- स्थानों पर: घर, मंदिर, ऑफिस, दुकान

गणेश जी की आरती Lyrics – संपूर्ण रूप
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूषक की सवारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े, फल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
गणेश जी की आरती (हिंदी में अर्थ सहित):
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
अर्थ:
हे भगवान गणेश! आपकी जय हो, आप सब देवताओं में श्रेष्ठ हैं।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अर्थ:
आप माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र हैं।
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
अर्थ:
आप एकदंत (एक दांत वाले) हैं, और आपकी चार भुजाएँ हैं। आप करुणा के सागर हैं।
माथे सिंदूर सोहे, मूषक की सवारी॥
अर्थ:
आपके मस्तक पर सिंदूर (लाल चंदन) शोभा देता है, और आप अपने वाहन मूषक (चूहा) पर सवार होते हैं।
पान चढ़े, फल चढ़े और चढ़े मेवा।
अर्थ:
भक्त आपको पान, फल और सूखे मेवे चढ़ाते हैं।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
अर्थ:
आपको मोदक और लड्डू का भोग अर्पित होता है और संतजन आपकी सेवा करते हैं।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
अर्थ:
आप अंधों को दृष्टि देते हैं, और कोढ़ से पीड़ितों को नया शरीर प्रदान करते हैं।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
अर्थ:
आप संतानहीनों को संतान का वरदान देते हैं और गरीबों को धन-संपत्ति प्रदान करते हैं।
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
अर्थ:
भक्त सूरदास आपके चरणों में आया है, कृपया उसकी सेवा को सफल कीजिए।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
(दोहराव – यह आपकी दिव्य उत्पत्ति का स्मरण कराता है)
ज्योतिषीय सुझाव: आरती करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
- मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
- साफ़ वस्त्र पहनें और मानसिक रूप से शांत रहें।
- घी का दीपक जलाएं (विशेष रूप से बुधवार को)।
- आरती के बाद ताली बजाकर पूरे स्थान को ऊर्जा से भर दें।
- आरती के बाद प्रसाद (मोदक या लड्डू) सभी को वितरित करें।
First Published on: November 8, 2025 9:09 pm IST




