श्री लक्ष्मी माता की आरती |Mata Laxmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi

इस लेख में जानिए लक्ष्मी जी की आरती 'ॐ जय लक्ष्मी माता' का अनुभव आधारित विवरण, आरती के शुद्ध बोल, अर्थ सहित पंक्तियाँ, पूजन विधि, आरती के बाद तुलसी पूजन की परंपरा और FAQs। यह मार्गदर्शिका आपके घर में सुख-समृद्धि का प्रवेश सुनिश्चित करेगी।

श्री लक्ष्मी माता की आरती |Mata Laxmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi

हर शुक्रवार जब माँ लक्ष्मी की आरती करती हूँ, घर का माहौल ही बदल जाता है। एक बार दीपावली पर मैंने जब विधिवत् माँ की आरती की थी — कपूर, कमल, गुलाब और गाय के घी का दीपक जलाकर — उस रात मन में जो शांति आई, वैसी अनुभूति शब्दों में नहीं बंध सकती। अनुभव से सीखा कि आरती के समय ध्यान, शुद्धता और नियम बहुत ज़रूरी हैं।
ध्यान रखें: आरती के बाद तुलसी माता को आरती जरूर दिखाएं और फिर घर के सभी सदस्यों को आरती दें। इससे घर में लक्ष्मी का वास होता है और दरिद्रता दूर रहती है।

महालक्ष्मी नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् सुरेश्वरि।
हरिप्रिये नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् दयानिधे।।

पद्मालये नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं च सर्वदे।
सर्व भूत हितार्थाय, वसु सृष्टिं सदा कुरुं।।

सब बोलो लक्ष्मी माता की जय, लक्ष्मी नारायण की जय।

🌿 आरती के बाद तुलसी माता को आरती दिखाना अनिवार्य है, विशेषकर शुक्रवार और दीपावली पर। उसके बाद ही घर के सभी सदस्यों को आरती दी जाए।

Mata Laxmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi
Mata Laxmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निसदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

उमा, राम, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
सुर मुनिजन सेवत, महिमा अतिभाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता।
कर्म प्रभाव प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

शुभ गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि जाटा।
रत्न चतुर्दश तू ही, कोई नहीं पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

  • ॐ जय लक्ष्मी माता – हे माँ लक्ष्मी, आपकी जय हो; आप समस्त सुख-समृद्धि की देवी हैं।
  • तुमको निसदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता – स्वयं भगवान विष्णु भी आपकी सेवा करते हैं।
  • उमा, राम, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता – आप ही सब देवियों का आदि रूप हैं।
  • सुर मुनिजन सेवत, महिमा अतिभाता – देवता और मुनिजन आपकी महिमा का गान करते हैं।
  • तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता – आप त्रैलोक्य में निवास कर सबको शुभ फल देती हैं।
  • कर्म प्रभाव प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता – आप कर्मों को प्रकाशित कर संसार से मुक्त करती हैं।
  • जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता – जहाँ आपकी कृपा होती है, वहाँ हर गुण और वैभव आता है।
  • सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता – आपकी उपस्थिति से मनोबल बढ़ता है और कठिनाइयाँ दूर होती हैं।
  • तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता – समस्त ऐश्वर्य और वैभव आपकी कृपा से ही संभव हैं।
  • खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता – भोजन, वस्त्र, धन – सब आपकी देन हैं।
  • शुभ गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि जाटा – आप क्षीर सागर से उत्पन्न होकर सौंदर्य और शुभता की देवी हैं।
  • रत्न चतुर्दश तू ही, कोई नहीं पाता – समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में आप सर्वोत्तम हैं।
  • महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई जन गाता – आरती गाने वाले को माँ की कृपा मिलती है।
  • उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता – हृदय में आनंद और जीवन में पवित्रता का वास होता है।

लक्ष्मी माँ शुक्र ग्रह की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनकी आरती करने से शुक्र ग्रह सशक्त होता है और ऐश्वर्य, वाहन, भोग, सौंदर्य, कला और धन की प्राप्ति होती है।
विशेषकर शुक्रवार, पूर्णिमा, और दीपावली की रात “ॐ जय लक्ष्मी माता” आरती करने से राहु-केतु दोष, आर्थिक संकट, और दरिद्रता दूर होती है।
आरती के तुरंत बाद तुलसी को दीप दिखाना अनिवार्य है, क्योंकि लक्ष्मी जी का निवास वहीँ टिकता है जहाँ तुलसी का स्थान होता है।

प्र. क्या आरती करने से पहले कोई विशेष मंत्र बोलना ज़रूरी है?
हाँ, “महालक्ष्मी नमस्तुभ्यम्…” दोहे से शुरुआत करें। यह देवी को आमंत्रण देता है।

प्र. तुलसी को आरती क्यों दिखाना चाहिए?
तुलसी माता विष्णु प्रिया हैं और लक्ष्मी माँ का निवास वहीं होता है जहाँ तुलसी होती हैं।

प्र. क्या दीपावली पर आरती का विशेष फल होता है?
हाँ, दीपावली को माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं; उस दिन की आरती विशेष फलदायक होती है।

प्र. क्या केवल महिलाएँ लक्ष्मी आरती कर सकती हैं?
नहीं, कोई भी श्रद्धालु पुरुष या महिला लक्ष्मी आरती कर सकता है।

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TOPICS Laxmi

First Published on: November 9, 2025 3:53 pm IST

About the Author: Ritika Rawal

I am Ritika Rawal, a ground-level religious writer exploring Gods, Aarti traditions, Horoscope, Panchang and temple culture. I work closely with local pandits and experienced astrologers, bringing their real insights to readers. My focus is pure, authentic spiritual reporting that connects rituals with everyday faith.