शिवजी की आरती: ॐ जय शिव ओंकारा | Shiv Aarti Lyrics in Hindi with Meaning (PDF Download)

सोमवार या महाशिवरात्रि के दिन ‘ॐ जय शिव ओंकारा’ आरती करने से मन को अद्भुत शांति मिलती है। यहाँ जानिए शिवजी की आरती के पूरे बोल, अर्थ और पूजा का महत्व। साथ में PDF डाउनलोड करने का विकल्प भी उपलब्ध है।

शिवजी की आरती: ॐ जय शिव ओंकारा | Shiv Aarti Lyrics in Hindi with Meaning (PDF Download)

जब भी मैं सोमवार की सुबह ‘ॐ जय शिव ओंकारा’ आरती करती हूँ, मन में एक अद्भुत शांति उतर आती है। घंटी की गूंज और धूप की महक के साथ जैसे पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है। कई बार व्यस्त दिनचर्या में भी यह आरती मात्र पाँच मिनट का समय लेकर मुझे पूरे दिन के लिए स्थिरता दे जाती है।
आरती करते समय ध्यान रहे – चेहरे पर शांत भाव रखें, जल या दूध से शिवलिंग का अभिषेक करें और आरती के दौरान कोई जल्दबाज़ी न करें। एक नियम यह भी रखें कि आरती के बाद कुछ क्षण मौन रहकर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप ज़रूर करें।

ॐ जय शिव ओंकारा
ॐ जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

Shiv Aarti Lyrics in Hindi with Meaning
Shiv Aarti Lyrics in Hindi with Meaning

  • ॐ जय शिव ओंकारा – हे शिव! आप स्वयं ओंकार स्वरूप हैं, आपको नमन है।
  • ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा – आप ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों का संयुक्त स्वरूप हैं।
  • एकानन चतुरानन पंचानन राजे – एक मुख, चार मुख और पाँच मुखरूप में भी आप ही राज करते हैं।
  • हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे – ब्रह्मा के हंस, विष्णु के गरुड़ और आपके नंदी वाहन – सब आपमें ही हैं।
  • दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे – दो, चार या दस भुजाओं में आपका तेज अद्वितीय है।
  • त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे – सत्व, रज और तम – तीन गुणों से आप सृष्टि को संचालित करते हैं।
  • अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी – आप अक्षमाला और रुण्डमाला (खोपड़ियों की माला) धारण करते हैं।
  • चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी – मस्तक पर चंद्रमा और चंदन से आपका रूप अत्यंत शांत है।
  • श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे – सफेद, पीले वस्त्र या बाघ की खाल – सभी आप पर सुशोभित हैं।
  • सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे – सनकादि ऋषि, गरुड़ और भूतगण आपके संग उपस्थित हैं।
  • कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता – आपके हाथों में कमंडल, चक्र और त्रिशूल सृष्टि के प्रतीक हैं।
  • जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता – आप ही सृष्टि के रचयिता, पालक और संहारक हैं।
  • ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका – ये तीनों ही आपकी माया में लीन होकर एक हैं।
  • प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका – ‘ॐ’ अक्षर में तीनों देव एक हो जाते हैं।
  • काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी – काशी में नंदी सहित विश्वनाथ स्वरूप में आप विराजमान हैं।
  • त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे – जो मनुष्य इस आरती को गाता है, वह तीन गुणों से परे हो जाता है।
  • कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे – शिवानन्द स्वामी कहते हैं कि इससे मनोकामना पूर्ण होती है।

ज्योतिष अनुसार, भगवान शिव को ग्रहों के संतुलन का अधिपति माना गया है। सोमवार को आरती करने से चंद्रमा की शांति होती है और मन स्थिर रहता है। राहु-केतु या शनि की दशा में ‘ॐ जय शिव ओंकारा’ आरती अत्यंत लाभकारी होती है। यह आरती नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर जीवन में आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति का संचार करती है।

प्र. शिव आरती करने का सही समय क्या है?
सुबह ब्रह्ममुहूर्त या संध्या के समय दीपक और धूप के साथ आरती करना श्रेष्ठ होता है।

प्र. क्या आरती बिना अभिषेक के की जा सकती है?
हाँ, अगर अभिषेक संभव न हो तो केवल जल अर्पित कर आरती करें।

प्र. सोमवार को शिव आरती का विशेष फल क्या है?
चंद्रमा मजबूत होता है, मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन मिलता है।

प्र. आरती करते समय क्या बैठना चाहिए या खड़ा होना चाहिए?
संस्कारों के अनुसार खड़े होकर आरती करना अधिक शुभ माना गया है।

Shiv Aarti Lyrics in Hindi PDF Download



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First Published on: November 9, 2025 3:25 pm IST

About the Author: Ritika Rawal

I am Ritika Rawal, a ground-level religious writer exploring Gods, Aarti traditions, Horoscope, Panchang and temple culture. I work closely with local pandits and experienced astrologers, bringing their real insights to readers. My focus is pure, authentic spiritual reporting that connects rituals with everyday faith.