आरती कुंज बिहारी की | Krishna Ji Ki Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics in Hindi

आरती कुंज बिहारी की” श्रीकृष्ण की सबसे मधुर आरतियों में से एक है। इसमें उनके श्याम रूप, बंसी, राधा संग रास और वृंदावन की सुंदरता का वर्णन मिलता है। इस लेख में आरती के पूर्ण बोल, अर्थ सहित भाव और पूजन विधि शामिल हैं।

आरती कुंज बिहारी की | Krishna Ji Ki Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics in Hindi

जब मैंने पहली बार वृंदावन के निधिवन में “आरती कुंज बिहारी की” सुनी थी, वो क्षण आज तक मेरे अंतर्मन में बस गया है। जैसे मन मोर बन गया हो और राधा-कृष्ण के रास में झूमने लगा हो। यह आरती न केवल काव्यात्मक है बल्कि श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, उनके माधुर्य और रास लीला का जीवंत चित्रण है।
आरती करते समय एक नियम मैं हमेशा निभाती हूँ – शुद्ध देसी घी का दीपक, तुलसी दल का भोग, और आरती के बाद लौ को पूरे घर में घुमाकर नकारात्मकता को विदा करना। यह आरती केवल शब्द नहीं, श्रीकृष्ण से आत्मिक मिलन का मार्ग है।

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।

श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।

लतन में ठाढ़े बनमाली; भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक,

ललित छवि श्यामा प्यारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की।

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।

गगन सों सुमन रासि बरसै; बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग;

अतुल रति गोप कुमारी की॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा।

स्मरन ते होत मोह भंगा; बसी सिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच;

चरन छवि श्रीबनवारी की॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू।

चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू; हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद, कटत भव फंद।।

टेर सुन दीन भिखारी की॥ श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

Krishna Ji Ki Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics in Hindi
Krishna Ji Ki Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics in Hindi

  • “गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला”
    → श्रीकृष्ण के गले में बैजयंती की माला है और वे मधुर बांसुरी बजा रहे हैं।
  • “श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला”
    → उनके कानों में कुण्डल लटक रहे हैं, वे नंद बाबा के आनंद स्वरूप हैं।
  • “गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली”
    → उनका शरीर श्यामवर्ण है और राधा उनकी प्रिया हैं।
  • “भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक”
    → उनकी घुंघराली अलकें भौंरे जैसी, माथे पर कस्तूरी तिलक और मुख पर चंद्रमा जैसी आभा है।
  • “मोर मुकुट बिलसै, देवता दर्शन को तरसै”
    → सिर पर सोने का मोर-मुकुट शोभायमान है, देवता भी उनके दर्शन के लिए तरसते हैं।
  • “जहां ते प्रकट भई गंगा, स्मरण ते होत मोह भंगा”
    → जहाँ से गंगा प्रकट हुईं, उसका स्मरण करने से मोह का बंधन टूटता है।
  • “चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू”
    → वृंदावन की रज चकाचौंध करती है और चारों ओर श्रीकृष्ण की बंसी गूंजती है।

“आरती कुंज बिहारी की” प्रतिदिन करने से बुध और चंद्र ग्रह सशक्त होते हैं। यह आरती विशेषकर उन लोगों के लिए उपयोगी है जिन्हें मन की अशांति, विवाह में विलंब या बच्चों की ओर से चिंता हो।
पूर्णिमा, जन्माष्टमी, या शुक्रवार को यह आरती करने से मन और घर दोनों में रास रचता है।

प्र. यह आरती किस समय करनी चाहिए?
सुबह या संध्या पूजन में दीपक और तुलसी दल के साथ करें।

प्र. क्या इसे संकीर्तन में शामिल किया जा सकता है?
बिलकुल! यह आरती संकीर्तन में भक्ति रस को चरम पर ले जाती है।

प्र. क्या इसे केवल मंदिरों में ही गाया जाता है?
नहीं, आप घर पर भी पूरे भाव से गा सकते हैं।

प्र. क्या आरती के बाद भोग देना आवश्यक है?
हाँ, तुलसी के साथ माखन-मिश्री या फल का भोग अर्पित करें।

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First Published on: November 9, 2025 4:59 pm IST

About the Author: Ritika Rawal

I am Ritika Rawal, a ground-level religious writer exploring Gods, Aarti traditions, Horoscope, Panchang and temple culture. I work closely with local pandits and experienced astrologers, bringing their real insights to readers. My focus is pure, authentic spiritual reporting that connects rituals with everyday faith.