Aloo Matar Paratha Recipe: सर्दियों की सुबह और शाम को आलू मटर पराठे के साथ बनाएं स्पेशल, स्वाद ऐसा कि पेट भर जाए पर मन न भरे!
आलू मटर पराठा केवल एक नाश्ता नहीं, सर्दियों की रसोई की रूह है। जब देसी घी में तवे पर सिकता है और साथ में हरा अचार या मक्खन रखा हो — तो हर निवाला सिर्फ पेट नहीं, आत्मा तक को तृप्त करता है। यह रेसिपी पारंपरिक स्वाद, स्टफिंग बैलेंस और असली घरेलू अनुभव से भरी है।

सुबह के पाँच बज रहे थे। ठंडी हवा नाक की सीध में चुभ रही थी, और रजाई छोड़ना किसी युद्ध से कम नहीं था। लेकिन जैसे ही मां ने किचन में बेलन उठाया और कढ़ाई से पहला पराठा तवे पर पड़ा — तो पूरी हवेली में घी की खुशबू फैल गई।
यह कोई इंस्टाग्राम-फ्रेंडली कहानी नहीं, बल्कि मेरी ज़िंदगी का एक बहुत ठोस, सर्दियों का अनुभव है — “आलू मटर पराठा”, जो सिर्फ खाना नहीं, एक परंपरा है।
पराठा बनाना नहीं, बनवाना सीखो
जब मैंने पहली बार पराठा बेलने की कोशिश की — 2021 की जनवरी थी, बाहर तापमान 8°C, और अंदर गैस बंद थी क्योंकि सिलेंडर खत्म हो गया था। उस दिन मटर के दाने मैंने कांपते हाथों से छीलकर रखे थे, और आलू जो उबाले थे, वो आधे कच्चे थे क्योंकि प्रेशर कुकर ने सीटी ही नहीं मारी।
सीख: सर्दियों में सुबह गैस की सप्लाई अक्सर स्लो होती है। अगर आप जयपुर या दिल्ली जैसे शहर में रहते हैं तो सुबह 6 से 8 बजे के बीच किचन पहले से गर्म कर लें — वरना पराठा नहीं, जंग लगे बेलन से जूझना पड़ेगा।
स्टफिंग का खेल: एक चुटकी ही काफी है
मेरे अनुभव में मटर सबसे बड़ा विलेन है — अगर सही से न पीसा जाए तो पराठा फट जाएगा।
मैंने एक बार चॉप में मटर डाले बिना पीस दिए। परिणाम? जब बेलन घूमा, तो हर दिशा में हरा रंग फैला।
गांव में एक नानी ने कहा था: “मटर को अदरक, हरी मिर्च और ज़ीरे के साथ हल्का भूनो — तब जाकर वो पेट में जमेगा, नहीं तो हवा में उड़ जाएगा।”
असली संतुलन है –
- आलू: 3 मध्यम
- मटर: 1 कप
- नमक: बिल्कुल हाथ से माप कर (क्योंकि चम्मच से स्वाद नहीं आता)
घी या तेल? — यह बहस नहीं, धर्म है
मेरे पिताजी पराठे में सिर्फ अमूल मक्खन लगाते हैं। मां सरसों के तेल में सेकती हैं। और दादी कहती हैं — “देसी घी के बिना ये पराठा पराठा नहीं, सूखा टुकड़ा है।”
मैं? मैं आधा सेकने के बाद बटर पे ब्रश घुमा देती हूँ — ताकि हर बाइट में घी न हो, लेकिन स्वाद में उसकी छाप बनी रहे।
घी की मात्रा एकदम सटीक होनी चाहिए। ज़्यादा हुआ तो हाथ चिकने और दिल भारी। कम हुआ तो क्रंच नहीं आता।
अचार के बिना अधूरा स्वाद
मैंने हर बार देखा है — चाहे वह हल्दीराम का आम अचार हो या गांव से आया नींबू का, एक तीखी चीज़ पराठे को पूरा बनाती है।
2019 में मैं जैसलमेर ट्रिप पर थी। वहां एक ढाबा था — “शिव शक्ति भोजनालय”।
उन्होंने आलू मटर पराठा के साथ 3 अचार दिए —
- मेथी-मिर्च
- कचरी-लहसुन
- सौंठ-खजूर की चटनी
यहीं सीखा: सर्दियों में मीठा अचार स्वाद का तापमान बैलेंस करता है।
छोटी सलाहें, जो किसी रेसिपी में नहीं मिलतीं
- मटर को उबालने से पहले नमक मत डालो — वरना रंग भूरा हो जाता है।
- आलू अगर बहुत पुराने हैं, तो स्टफिंग में खट्टापन आ सकता है।
- आटा गूंथने से पहले उसमें 1 छोटा चम्मच अजवायन मिला दो — सर्दियों में पाचन आसान रहेगा।
सर्दी में पराठा खाना सिर्फ भूख नहीं, अनुभव है
जब आप दरवाज़ा खोलकर बाहर की कोहरा देखते हुए गरम पराठा हाथ में लेते हैं, और उसकी भाप नाक से टकराती है — वो कोई प्लेट की चीज़ नहीं, वो एक भाव है।
मेरे घर में आज भी रविवार का मतलब है – 8 बजे उठना, रेडियो पर पुराने गाने और रसोई से आती “तड़का लग गया” की आवाज़। और हर बार जब पहला पराठा मुंह में जाता है — तो लगता है, ठंड हारी, हम जीत गए।
First Published on: November 14, 2025 8:06 pm IST




