Beetroot Halwa Recipe: त्योहार हो या कोई स्पेशल दिन, मीठे में बनाएं चुकंदर का हलवा, जानें आसान रेसिपी

Beetroot Halwa Recipe in Hindi: देसी घी और दूध में पका चुकंदर का हलवा एक स्वादिष्ट, पौष्टिक और त्योहारों के लिए परफेक्ट मिठाई है। जानें स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी, खास टिप्स और पारंपरिक फ्लेवर के साथ इसे परोसने का सही तरीका।

Beetroot Halwa Recipe: त्योहार हो या कोई स्पेशल दिन, मीठे में बनाएं चुकंदर का हलवा, जानें आसान रेसिपी

जब मैंने पहली बार चुकंदर का हलवा बनाया था, तो ईमानदारी से कहूं — मैं खुद थोड़ा हिचक रही थी। घर में चुकंदर को लेकर राय हमेशा दो हिस्सों में बंटी रही है। मेरे पापा इसे सलाद के रूप में खाते हैं — नमक-नींबू डालकर, और मेरी बेटी इसे देखकर नाक सिकोड़ लेती है। लेकिन एक दिन सर्दियों में, जब गाजर खत्म हो गई और मीठे की तलब लगी, मैंने वही चुकंदर उठाया और कुछ अलग करने की ठानी।

एक बार बनाकर देखा, फिर बार-बार बनता गया। इसकी वजह सिर्फ स्वाद नहीं है, बल्कि वो भावनाएं हैं जो इसके साथ जुड़ गईं। जब यह हलवा पकता है, तो रसोई में एक मिट्टी जैसी मीठी-सी, earthy खुशबू फैलती है — जैसे धरती खुद घी में पिघल रही हो।

  • चुकंदर (Beetroot) – 2 कप (कद्दूकस किया हुआ, लाल रंग वाला देशी चुकंदर ज़रूरी है)
  • देसी घी – 3 बड़े चम्मच (Amul या घर का बना हो तो और बेहतर)
  • फुल क्रीम दूध – 1 कप (टोंड दूध से वह मलाईदारपन नहीं आता)
  • इलायची पाउडर – 1 छोटा चम्मच (ज़रूर डालें, इसकी सुगंध मिठास को ऊँचा करती है)
  • चीनी – 4 बड़े चम्मच (या स्वादानुसार, लेकिन मैंने तौलकर इतनी रखी है)
  • काजू – 8-10, छोटे टुकड़े (पहले घी में भून लें)
  • बादाम/पिस्ता – 10-12, स्लाइस में कटे हुए (ऊपर से सजाने के लिए)

1. चुकंदर को कद्दूकस करते समय…

मैं हमेशा ताज़ा, लाल रंग का चुकंदर लेती हूँ — जो छीलते ही हाथ लाल कर दे। सर्दियों में मंडी से ही खरीदना बेहतर है। जब आप इसे कद्दूकस करें, तो उसमें से हल्का रस निकलेगा — वही रस रंग और मिठास का आधार है।

2. घी में भूनने का धैर्य

कड़ाही में घी गरम करके पहले काजू भून लें, निकाल लें। फिर चुकंदर डालें। यह स्टेप तेज़ न करें। धीमी आंच पर 12-15 मिनट भूनिए। आवाज़ आएगी — हल्की चूंचूं की, और चुकंदर रंग गाढ़ा करने लगेगा। यहाँ अगर अधपका रह गया, तो पूरा स्वाद बिगड़ सकता है।

3. दूध डालने का सही समय

जब चुकंदर से कच्ची गंध चली जाए और वह थोड़ा नरम हो जाए, तभी दूध डालें। दूध डालते ही हलवे में एक नरम, हल्का गुलाबी रंग आएगा — यही असली संकेत है कि सब कुछ सही जा रहा है।

4. अब शक्कर और सुगंध

दूध जब थोड़ा सूखने लगे, तब चीनी डालें। याद रखें, चीनी डालते ही मिश्रण पतला होगा — घबराइए मत। इसे फिर से धीमी आंच पर पकाइए, जब तक हलवा फिर से गाढ़ा न हो जाए।

अंत में इलायची पाउडर डालिए। इसे हाथ से कुचलकर डालना ज़्यादा असरदार होता है, बजाए पहले से पीसी हुई इलायची के।

5. सजावट और परोसना

ऊपर से काजू, बादाम, पिस्ता बिखेर दें। हल्का सा घी ऊपर डालें — यही असली पारंपरिक स्पर्श है।

  • एक बार मैंने बिना भूनें दूध डाल दिया — हलवा कीचड़ जैसा हो गया, स्वाद फीका।
  • फ्रिज में रखा लेकिन ढक्कन ठीक से बंद नहीं किया — पूरी मिठाई में फ्रिज की गंध भर गई।
  • गाढ़ा करने के चक्कर में ज़्यादा देर तक पकाया — नीचे जल गया और हलवे में कड़वाहट आ गई।
  • यह हलवा फ्रिज में 3–4 दिन तक आराम से टिकता है।
  • आप इसे एयरटाइट डिब्बे में पैक करके सफर में भी ले जा सकते हैं — बशर्ते ठंडा हो और ऊपर से थोड़ा घी लगा हो।
  • बच्चों को देने से पहले थोड़ा दूध और मिलाकर हल्का गरम कर लें — पोषण और स्वाद दोनों सही बैठता है।
  • सर्दियों की रातें, जब शरीर को गर्माहट चाहिए।
  • व्रत के बाद, जब कुछ हल्का-मीठा और पौष्टिक खाना हो।
  • त्योहारों पर, खासकर करवा चौथ, लोहड़ी, या मकर संक्रांति जैसे पारंपरिक मौकों पर।

इस हलवे में कोई तेज मिठास नहीं है, बल्कि एक धीमी, धीरे-धीरे खुलती मिठास है — जैसे किसी पुराने रिश्ते की तरह, जो पहले अनजान लगे और फिर बहुत अपना-सा हो जाए। इसका रंग सिर्फ नज़र नहीं भरता, दिल भी भर देता है।



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First Published on: November 15, 2025 1:59 pm IST

About the Author: saurabh

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